जानिए कैसे ? मामूली लागत पर घर में भी मशरूम की खेती कर अधिक आमदनी कर सकते हैं किसान

Masroom Farming

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : आसमान छूती सब्जी की कीमत में मशरूम की खेती कर किसान बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं । जिन किसानों के पास पूंजी का अभाव और कृषि योग्य भुमि नही है तो उन किसानों के लिए वरदान के रूप में मशरूम की खेती है । उक्त जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर बेगुसराय के वरीय कृषि वैज्ञानिक व प्रधान डॉ. राम पाल ने बताया कि प्रकृति ने हमें वनस्पति के रूप में कई प्रकार की खाद्य वस्तुएं दी हैं। उन्हीं में से मशरूम एक है । मशरूम के पौधे में ढेर सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जाे हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता हैं।

मशरूम न सिर्फ हम स्वस्थ रखने में मदद करती है, बल्कि बीमारी की अवस्था में उससे उबरने में भी मदद कर सकती है। इसका उत्पादन महज थोड़ी सी जगह में कम लागत और कम समय मे खेती कर किसान अपनी आय को दोगुनी कर सकतें है । उन्होंने किसानों को आधुनिकतम वैज्ञानिक तकनीक से मशरूम की खेती करने के बारे में विस्तृत जानकारी दिया । मशरूम की वेरायटी को जानकारी देते हुए बताया कि मूलतः मशरूम की तीन वेरायटी होती है । वटन मशरूम,ढींगरी मशरूम जिसे आयस्टर मशरूम के नाम से भी जाना जाता है,जबकि दूधिया मशरूम को मिल्की मशरूम के नाम से जाना जाता है।

ऐसे करें मशरूम की खेती : मशरूम की खेती का तरीका बताते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. पाल ने कहा कि सर्वप्रथम किसान दस किलो भूसे को 100 लीटर पानी मे 150 मिली. फार्मलिन, सात ग्राम कॉर्बेंडाजिन को पानी में घोलकर में डुबोकर उसका शोधन किया करें। भूसा भिगोने के बाद लगभग बारह घंटे यानि अगर सुबह फैलाते हैं तो शाम को और शाम को फैलाते हैं तो सुबह निकाल दें, इसके बाद भूसे को किसी जालीदार बैग में भरकर या फिर चारपाई पर फैला देते हैं, ताकि इसका अतिरिक्त पानी भूसे में से निकल जाय।इसके बाद एक किलो सूखे भूसे को एक बैग में तीन लेयरो में भरें इस दौरान सभी लेयरों पर किनारे में स्पॉन यानी मशरूम के बीज डाले ।

थैलियां तैयार होने के बाद उन थैलियों को एक ऐसे कमरे या बंद जगह में रखें , जहां का तापमान 20 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड और नमी 80 से 85 प्रतिशत हो । अगले 15 से 20 दिनों तक इंतजार करें , तो देखेंगे कि उन थैलियों के ऊपर खुम्बी का कवक चारो तरफ एक जाल की तरह निकल आता है । खुम्बी आने के 15 से 20 दिन बाद यानी लगाने के 35 से 40 दिन बाद ये छोटे छोटे छत्ते का रूप धारण कर लेती है । जिसका उपयोग लोग सब्जी के रूप में करते हैं । मशरूम को बाजारों में बेचकर भी किसान अच्छी खासी आमदनी कर सकते हैं ।बटन मशरूम की तुड़ाई

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