बेगूसराय में निजी पम्पसेट बना है किसानों के पटवन का सहारा , फाईलों तक सिमटी है राजकीय नलकुल का काम

Agriculture Irrigation

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : बेगूसराय में किसानों की किसानी हमेशा से परेशानियों का सबब रहा है।बुआई से लेकर कटनी तक तरह तरह के समस्याओं से जुझते हुए आज भी खेती करने की विवशता है।क्षेत्र में अधिकांश राजकीय नलकुप विभिन्न कारणों से ठप है।लिहाजा आम किसानों को पटवन करने की एक बड़ी समस्या सुरसा के तरह मूँह बाये खड़ा है।परिणाम है कि निजी पम्पसेट के सहारे कृषक मँहगी पटवन करने को विवश नजर आ रहे हैं।

कहने को राज्य सरकार कृर्षि रोड मैप बनाकर नित्य नये प्रयोग कर रही है।लेकिन इसका कड़वा सच यह है कि जमीनी स्तर पर राजकीय नलकुप से पटवन की बात गुजरे जमाने की बात हो गयी है।कृषि के नये तकनीक के साथ अब पटवन किसानों के लिये किसी चुनौती से कम नही है।किसानी का मतलब साफ है कि पटवन के लिए पूरी तरह से अपना जुगाड़ होना चाहिए।सरकारी नलकुप के भरोसे खेती करना अब पुरानी बात भर रह गयी है।

विभागीय अधिकारी नही दिखा रहे दिलचस्पी बंद पड़े राजकीय नलकुप को चालू करने की दिशा में वर्षो से विभागीय अधिकारियों की दिलचस्पी लगभग समाप्त हो गयी है।क्षेत्र के तकरीबन हर जगह राजकीय नलकुप से निकलने वाली पानी जो नाला होकर किसानों के खेतों तक पहूँचा करता था।ऐसे तमाम नाले ध्वस्त हो चुके हैं।जगह-जगह इसे आँपरेट करने वाले आँपरेटर सेवानिवृत हो गये हैं।जहाँ बहाली भी नही हो सकी है।और तो और हर नलकुप में विधुत तार,ट्रांसफार्मर,मोटर सहित अन्य आवशयक समाग्री का आभाव इस नलकुप को चालू कर पाना बड़ी चुनौती से कम नही है।
कुछ जगहों पर चालु तो हुये,लेकिन फिर से हो गया बंद।

क्षेत्र में कुछ जगहों पर राजकीय नलकुप हाल के वर्षों में बिजली के माध्यम से चालु करने की कसरत विभाग की ओर से की गयी।कहीं कहीं चालु भी किया गया,और पटवन भी शुरू हुये,लेकिन पुनः उसी स्थिति में राजकीय नलकुप चला गया है।हलांकि किसानों के खेत तक विधुत और ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कर विभाग और सरकार सस्ते दर पर पानी पटवन की व्यवस्था कर रही है,लेकिन इसका पुरा पुरा फायदा अधिकांश किसान को नहीं मिल पा रहा है। जिले के छौड़ाही प्रखण्ड क्षेत्र के सहुरी,सिंहमा,अमारी,शाहपुर,सांवत,ऐजनी, नारायणपीपड़,परोड़ा एवं एकम्बा पंचायत के विभिन्न बहियारों में लगे राजकीय नलकुप में से कई के जिर्णोद्धार के बाद भी एक बुँद पानी नहीं टपक सका है।अलबत्ता वैसे राजकीय नलकुप के जिर्णोद्धार पर खर्च किये गये राशि बेकार होना प्रतीत हो रहा ।

सरकारी नलकूप हो गयी पुरानी बात किसान चंदन कुमार सिंह , चितरंजन प्रसाद सिंह ने कहा कि राजकीय नलकुप अब गुजरे जमाने की बात हो गयी है।सरकार का यह विभाग पूरी से निक्ममी हो गयी है।अधिकारी बैठकर सिर्फ वेतन लेते हैं।पिछले कुछ साल पहले ईब्राहिपुर रामपुरकचहरी बहियापुर के राजकीय नलकुप को चालु किया गया था,लेकिन फिर से बंद हो गया है।लिहाजा यहाँ के किसानों का मुख्य नगदी फसल गन्ना में इस चिल्लचिलाती घुप में पटवन करने में महँगाई में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हुजूर हमलोग अब भूल गये हैं कि राजकीय नलकुप से भी पटवन भी होता था।सरकार को ऐसे विभाग पर हो रहे फिजूलखर्ची पर रोक लगाना चाहिये,अन्यथा किसानों के हित में अविलंब इन बंद पड़े राजकीय नलकुप को चालु किया जाना चाहिये। सरकार को राजकीय नलकुप दुरूस्त करने की दिशा में सार्थक पहल करना चाहिये।इतने बड़े विभाग और अधिकारियों की फौज के बाबजूद राजकीय नलकुप दशा घोर चिंता का विषय है।पटवन में किसानों को भारी कठिनाई होती है।राज्य की सरकार राजकीय नलकुप को दुरूस्त करने के वजाय प्रतिदिन नयी घोषनाएंं कर किसानों के साथ क्रुर मजाक कर रहीं हैं।

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