Begusarai News : दहेज प्रथा की कड़वी हकीकत एक बार फिर अदालत में बेनकाब हुई है। बेगूसराय जिले के मंझौल कोर्ट ने खोदाबंदपुर थाना क्षेत्र के मेघौल गांव की बहू संगीता हत्या कांड में कठोर फैसला सुनाते हुए उसके पति अभिषेक कुमार और ससुर राम सुखित सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे संजय कुमार सिंह की अदालत ने इस जघन्य अपराध को समाज के लिए चेतावनी मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।
अदालत ने दोनों दोषियों को धारा 302/34 और 302/120बी के तहत आजीवन कारावास के साथ 20-20 हजार रुपये जुर्माना, जबकि धारा 201/34 में 7 वर्ष कैद व 5 हजार रुपये जुर्माना दिया है। मामले में एपीपी राकेश कुमार द्वारा प्रस्तुत 12 गवाहों की गवाही ने घटना की सच्चाई अदालत के सामने स्पष्ट कर दी। कोर्ट ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलने का आदेश दिया है।
शादी के बाद शुरू हुआ दहेज का अत्याचार : जानकारी के अनुसार, पहसारा नावकोठी निवासी बलभद्र सिंह ने अपनी पुत्री संगीता की शादी वर्ष 2006 में खोदाबंदपुर थाना क्षेत्र के मेघौल निवासी राम सुखित सिंह के पुत्र हरिशंकर उर्फ अभिषेक कुमार से हिंदू रीति-रिवाज के साथ धूमधाम से की थी।
लेकिन खुशियों का यह अध्याय ज्यादा लंबा नहीं चला। शादी के कुछ ही समय बाद पति और ससुर द्वारा दहेज को लेकर प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया। संगीता ने 2012 में दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया, पर अत्याचार की आग बुझने के बजाय और भड़कती चली गई।
14 अगस्त 2019 : जब सब कुछ अचानक खत्म हो गया : 14 अगस्त की शाम संगीता का बेटा अपने नाना को कांपती आवाज में फोन कर बोला– ‘नाना मम्मी घर में नहीं हैं…‘ यह खबर पूरे परिवार को झकझोर देने वाली थी। परिजनों ने तत्काल थाने में लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।
अगले ही दिन 15 अगस्त को सूचना मिली कि संगीता का शव सदर अस्पताल में पड़ा है। जब परिजनों ने दामाद और ससुर से पूछताछ की तो दोनों चुप्पी साधे रहे। बाद में खुलासा हुआ कि संगीता के शव को हनुमान गढ़ी गुप्ता बांध के पास फेंक दिया गया था।

