“पुण्यतिथि विशेष” डॉ भोला सिंह – डमरू वादक आगो का शोला हूं,सदा जीवित हूं, हाँ मैं ‘भोला’ हूँ

DR. Bhola singh puny tithi

डेस्क : ओजस्वी वाणी, समाज सेवा के प्रणेता, राजनीति में संघर्ष के पर्याय और बेगूसराय की राजनीति के पटल पर छपा एक अजेय नाम सांसद डॉ भोला सिंह। आज के दिन ही 2018 में उनकी अंतिम विदाई हुई ।

प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा तक हुई बेगूसराय में

डॉ भोला सिंह का जन्म 3 जनवरी 1939 को बेगूसराय में हुआ। इनके पिता जी का नाम रामप्रताप सिंह और माता जी का नाम टुनकी देवी था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव से हुई उसके बाद जयमंगला उच्च विद्यालय से मैट्रिक पास की। फिर जी डी कॉलेज से बी ए तथा पटना यूनिवर्सिटी से एम ए किया। एम ए करने के बाद इन्होंने 1964 में टी एन बी कॉलेज भागलपुर में अस्थाई तथा 1966 में जी डी कॉलेज बेगूसराय में स्थाई लेक्चरर बने।

लेक्चरर बनने से लेकर कुशल राजनेता बनने तक का सफर

लेक्चरर की नौकरी से राजनीति में आकर नाम कमाने तक का सफर काफी अनोखा और संघर्ष मय रहा। 1967 में पहली बर्फ भोला बाबू निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल किया। 1972 में कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुचे पर 1976 में कम्युनिस्ट छोड़कर भोला बाबू के कांग्रेस जॉइन कर लिया। और लगातार तीन बार चुनाव जीते। 1984 में बिहार के गृह राज्य मंत्री बने 1988 में शिक्षा राज्यमंत्री रहे।

पुनः 1996 में कांग्रेस छोड़ राजद में शामिल हुए और 1999 में भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2003 में विधान सभा उपाध्यक्ष तथा 2008 में नगर विकास मंत्री रहे। वर्ष 2009 में नवादा तथा 2014 में बेगूसराय संसदीय क्षेत्र के सांसद बने। करीब 40 वर्षो के राजनीतिक सफर में भोला बाबू अपना परचम लहराते रहे।

आम जन के अपने भोला बाबू

आम जन को केंद्र में रखकर राजनीति करने की कला ने भोला बाबू को महान बना दिया। राजनीतिक विरोधाभासों, आरोपों प्रत्यारोपो के बावजूद भी इनकी पहचान, छाप अमिट है। विषम परिस्थितियों को हरा कर जीतने की जिजीविषा ने डॉ भोला सिंह को आम जन के लिए उनके प्रिय भोला बाबू बना दिया था। ओजस्वी वाणी,तेजस्वी व्यक्तित्व के धनी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ भोला सिंह बेगूसराय के अजातशत्रु थे। जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन मे बेगूसराय को अच्छी महत्ता दी। उनके निधन के बाद से बेगूसराय की राजनीति में उनकी रिक्तता हमेसा ही रहेगी।

आज के दिन में बेगूसराय से लेकर देश के कोने कोने के लोग उनको अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं।

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