बिहार: बढ़ सकते हैं ईंटों के दाम, ईट निर्माता संघ की बैठक में अनिश्चितकालीन भट्टा बंद करने का निर्णय- पढ़े पूरी खबर

Bricks Begusarai

डेस्क : अखिल भारतीय एवं बिहार ईंट निर्माता संघ के आह्वान पर पूरे बिहार में भट्टा संचालन को बंद करने का निर्णय हुआ है जिसमें आज बेगूसराय जिला ईंट निर्माता संघ ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी देने कि कोसिस की। बिहार ईंट निर्माता संघ के प्रदेश अध्यक्ष ” मुरारी कुमार मन्नू ” ने बताया की कोरोना काल से पीड़ित भट्ठे वाले को बिना कोई सरकारी सहायता के भट्ठे का संचालन करना परा है ।

पिछले वर्ष सीजन के सुरवात से असमय बारिश में कच्चे ईंटों के बार बार गलने से कच्चे ईंटों कि कमी हुई, कोयले कि अनुपलब्धता एवं पूँजी अभाव में बार बार भट्ठे कि आग बुझ जा रही थी जो कोयला 10000 रुपया कीमत वाली थी वो अब 24000 रुपया में बिकने लगा और बिहार में कोल कि गुणबता कि जांच कि बेबस्था नहीं होने से निम्न क्वालिटी कि कोल ने ईंट निर्माताओं को 100000 ईट पर 40 से 50 मीट्रिक टन कोयले कि खपत करा दी। बिहार राज्य माइनिंग कारपोरेशन के द्वारा जो कोल् आवंटित किया जाता है वो प्रयाप्त मात्रा में उपलब्धता नहीं होने से ईंट भट्ठे का संचालन दुस्कर कार्य सा हो गया।

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बेगुसराई ईंट निर्माता संघ के अध्यक्ष “अरविन्द कुमार” ने बताया की सरकारी कार्यों में लाल ईंट का प्रतिबन्ध और इसके मुख्य ग्राहक निम्न एवं माध्यम बर्गीय लोग लाल बालू की अनुपलब्धता से एवं आर्थिक संकट की वजह से ऊँची कीमत दे कर ईंट खरीदना या घर बनाने में असहज महसूस कर रहे है। इधर 1 अप्रैल से GST 1% से 6% एवं 5% से १२% हो जाने से, ईंट के खरीदार GST दे कर नहीं खरीदना चाहते हैं जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे ईंट निर्माताओं को अपने लागत पूँजी से टैक्स देना पर रहा है। बेगुसराई ईंट निर्माता संघ के सचिव “बबलू कुमार ” ने बताया की ईंट निर्माण में उत्पादन लागत 4 गुणी बढ़ गयी है परन्तु इन 7 वर्षों में ईटों की सरकारी दर में बृद्धि नहीं हुई है, इन कारणों से भट्टे मालिक 2-3 बरसों से आर्थिक कर्ज के तले डूब चुकेईंट निर्माण में उत्पादन लागत इतनी बढ़ गयी है की मुन्नाफा छोरये, लागत मूल्य भी ऊपर नहीं हो पा रहा है।

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उस पर सरकार का एकतरफा 6% GST बिना इनपुट के घोषणा से ईंट निर्माताओं को मजबूर होकर भट्ठे का संचालन बंद करना होगा। बेगुसराई ईंट निर्माता संघ के कोषाध्यक्ष “सुधीर कुमार ” एवं ” पप्पू जी ” ने बताया की लाल ईंट निर्माण का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पूंजीगत व्यवस्था का वरदान है। जहां पर कृषि सीजन से बैठार या बेरोजगार मजदूर को ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा कार्य से 5 गुना अधिक मजदूरी पाता है। बिहार का सरकारी विभाग भट्ठे कार्य को किसी ना किसी बहाने से सम्बंदित कर गैर कानूनी तरीके से प्रताड़ित करने के प्रयाश में लगे रहते हैं. इन सारी वजहों से भट्ठा मजदूर अपने इस रोजगार के साधन को बंद होते देख चिंतित हैं और भट्ठे के गैर सीजन में अग्रिम राशि के रूप में ले कर अपना जीबको पार्जन कर रहे थे वो असहज रूप से उत्जेजना में हैं संगठन अपने केंद्र सरकार या राज्य सरकार से सम्बंधित इन समस्याओं के प्रति उदासीन होते देख ईंट निर्माता परेशान हैं।

सरकार से ये मांग करती है की हमारे वेव्सायिक गतिबिधयों को देख GST का पुराने दर पर एवं कोयले को सस्ते दर पर उपलब्ध करने की सुनिश्चित वेव्यस्था करे एवं उत्पादन लागत पर मुनाफे को जोर लाल ईंट का सरकारी मूल्य पुनः निर्धारित करें। सरकार नदियों एवं नहरों के गाद और पोखरे के उड़ाही की मट्टी ईंट निर्मातों को सहज उपलब्ध करवाये और ईंट भट्ठे को माइनिंग से कोयला का कोटा बढ़ा कर उपलब्ध कराये और बैंकों से सस्ते दर पे ऋण उपलब्ध कराये तो ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों के चेहरे पे फिर से मुस्कान आ जाये।