देश के आम लोगों के बीच भरोसे का प्रतीक है LIC – इसका निजी करण जनहित के खिलाफ : परशुराम सिंह

LIC

तेघरा (बेगूसराय) एलआईसी बरौनी SO के अभिकर्ताओं की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए वरीय प्रबन्धक बेगूसराय ने अपने संबोधन में कहा कि 76% शेयर का मालिक अभी भी एलआईसी है।

1956 में एलआईसी के राष्ट्रीयकरण के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था। उस समय तत्कालीन भारत सरकार ने जीवन बीमा अध्यादेश लागू कर उस समय 154 स्वदेशी बीमा कंपनी और 16 विदेशी बीमा कंपनी एवं 75 भविष्य निधि समितियों के प्रबंधन रातों-रात पूर्ण रूप से अपने अधीन कर लिया तथा इसकी निगरानी एवं संचालन का जिम्मा भारत सरकार द्वारा नियुक्त 42 अभीरक्षक के अधीन कर दियार जिससे पॉलिसी धारकों और जनता के बीच विश्वसनीय है।

परशुराम सिंह MDRT ने यूलिप और अन्य पालिसी के बारे में विशेष जानकारी दी। अभिकर्ता संगठन के सचिव निर्भय सिंह ने बरौनी s o में अभकर्ताओं की हो रही असुविधाओं के बारे में अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया। संगठन की उपाध्यक्ष रामचंद्र गुप्त ने lic की निजीकरण की आलोचना करते हुए कहा कि LIC का निजीकरण पालिसी धारकों और देश हित के खिलाफ है।

यह सरकार अपने बजट के खर्चे को पूरा करने के लिए यह कार्य कर रही है। जो देश की अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है और जनहित के खिलाफ है सभा में उपस्थित अधिकारियों और अभिकर्ताओं का स्वागत बरौनी s o के प्रबंधक श्री पंकज कुमार ने किया

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