भागलपुर के ईंट भट्ठे की महिला मजदूर के बैंक खाते से 90 लाख ₹ का ट्रांजेक्शन, क्या है दिल्ली पुलिस और बेगूसराय कनेक्शन ?

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न्यूज डेस्क : एक तरफ जहां देश कोरोनाकाल में इस भीषण आपदा से जंग लड़ रहा है। वहीं आपदा को अवसर में बदलकर अलग अलग तरीकों से ठगी करने वाले गिरोह के लोगों ने भी लोगों की हालात और विवशता के बीच ठगी कर खूब चांदी काटी। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना से जंग लड़ रहे लोगों से ऑक्सिजन और रेमडीसीवीर देने के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी करने वाले लोगों पर दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच का शिकंजा कसता हुआ दिख रहा है। इस मामले की जांच में जब दिल्ली क्राइम ब्रांच की पुलिस भागलपुर पहुंची तो वहां से एक मजदूर महिला के बैंक खाते में हुए अवैध ट्रांसेक्शन को लेकर उसे ठगी के आरोप में गिरफ्तार कर दिल्ली ले गयी। जांच के क्रम में मामला की तार बिहार के भागलपुर से ही नहीं बेगूसराय से भी जुड़ता हुआ दिख रहा है।

क्या है पूरा मामला ऐसे समझिए: दिल्ली के एक थाना में ब्लेक रेट पर ऑक्सीजन व जीवन रक्षक दवाई खरीदने का मामला दर्ज हुआ। इसी कांड के अनुसंधानकर्ता दिल्ली पुलिस के एसआई करणवीर सिंह जांच के लिए बिहार के भागलपुर पहुंचे थे। बताया जाता है कि करीब एक माह पूर्व एक व्यक्ति ने दिल्ली में ऑक्सिजन सिलिंडर और रेमडेसिविर दवा को लाखों रुपये खरीदने का केस दर्ज कराया गया था। इस कांड के शिकायतकर्ता ने कालाबाजारी करने वाले गिरोह के बैंक खाते में पैसों के ट्रांसफर करने की बात पुलिस को बतायी। जांच में बैंक खाता बिहार के भागलपुर जिले के घोघा थाना क्षेत्र की कुछ महिलाओं का पाया गया। जिसके बाद उक्त बैंक प्रबंधन ने कालाबाजारी के दौरान ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल किये गये खातों की विस्तृत जानकारी खंगाली।

जिसमें पाया कि भागलपुर के 21 महिलाओं के बैंक खातों को कालाबाजारी के दौरान पैसों के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया। महिलाओं की विस्तृत जानकारी लेकर दिल्ली पुलिस शनिवार सुबह भागलपुर के घोघा थाना क्षेत्र पहुंची, जहां दिल्ली पुलिस ने भागलपुर पुलिस के सहयोग से पक्कीसराय, आमापुर व कहलगांव क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान ईंट भट्ठा पर काम करने बाली मजदूर औरत सरिता देवी की गिरफ्तारी हुई। अपनी गिरफ्तारी के बाद सरिता देवी ने जो दावा किया वो काफी चौकाने बाले हैं। उसने एक क बाद एक मामले से जुड़े कई सनसनीखेज राज उगले हैं। जिससे आने वाले समय में मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम बेगूसराय की रुख भी कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बेगूसराय के NGO संचालक का आया है नाम बताते चलें कि कोरोनाकाल में देशभर में जीवनरक्षक स्वास्थ्य सामग्रियों की लगातार कालाबाजारी की बात सामने आई । कालाबाजारी होने अलग-अलग क्रम से देशभर में आपदा को अवसर में बदलकर लूट खसोट मचा दिया गया था। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आई तो सभी के होश उड़ने लगे । अब ब्लैक मार्केटिंग के सिंडिकेट का तार बेगूसराय से भी जुड़ता दिख रहा है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक सरिता देवी ने बताया कि कुछ माह पूर्व ही छोटा भाई गुड्डू मंडल बेगूसराय निवासी साथी रौशन सिंह को लेकर आया था। रौशन सिंह ने एनजीओ के तहत कई योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आमापुर व पक्कीसराय में कई महिलाओं का बैंक खाता खुलवाया। दोनों ही गांव की 21 महिलाओं का आधार कार्ड लेकर पहले उनके नाम से एक नया मोबाइल सिम निकाला गया। इसके बाद नये मोबाइल नंबरों को ही बैंक खातों से जोड़ कर एचडीएफसी बैंक में सात महिला, केनरा बैंक में नौ महिला और यूनियन बैंक में पांच महिलाओं के खाते खुलवाये गये। सभी 21 महिलाओं के बैंक खातों के पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड सहित नये मोबाइल नंबरों के सिम भी रौशन सिंह अपने साथ लेकर चला गया । इसके बाद से बैंक खातों में दिल्ली सहित पूरे देश में कोविड 19 के दौरान हुए ऑक्सीजन सहित अन्य दवाओं की कालाबाजारी को लेकर भारी मात्रा में पैसों की लेन-देन की गयी ।

दैनिक भास्कर मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ठगी के खेल में बेगूसराय का अमित रोशन मास्टरमाइंड है। उसी ने सभी मजदूरों को झांसा देकर अलग-अलग बैंकों में खाता खुलवाया था। सरिता के खाते में 3 माह के दौरान करीब 90 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ है। जबकि सरिता की बहन पिंकी के खाते में 44 लाख और 3 अन्य परिजनों के खाते में भी पैसों का लेनदेन हुआ है। अब तक जांच में सरिता समेत 5 परिजनों के खाते में डेढ़ करोड़ से अधिक के ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं।

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