बिहार में “नमामि गंगे प्रोजेक्ट” के तहत, 6 शहरों में बन रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, इस वर्ष के अंत तक शुरू होने की उम्मीद

STP PLANT BIHAR

न्यूज डेस्क : देश में गंगा नदी सहित विभिन्न नदियों को स्वच्छ करने के लिए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक “नमामि गंगे प्रोजेक्ट” के तहत अभियान चलाया था। जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा सभी नदियों के अंदर प्रभावित हो रही विभिन्न फैक्ट्रियों के अपशिष्ट पदार्थ व नालियों के मल मूत्र से वंचित कराना का लक्ष्य रखा गया था। इसमें विभिन्न राज्यों को शामिल किया गया था। लेकिन, इस वर्ष के अंत तक बिहार में विभिन्न नदियों को साफ रखने को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल होने वाली है। आपको बता दे की राज्य के विभिन्न शहरों ने निकलने वाला सीवरेज व गंदे नालों का पानी अब गंगा, पुनपुन आदि नदियों में नहीं जायेगा। दरअसल, इस वर्ष के अंत तक राज्य में “नमामि गंगे परियोजना” के तहत छह शहरों के छह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं।

जानिए किन शहरों में प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं : बता दें कि इस योजना के तहत बिहार के पटना, सुल्तानगंज, बाढ़, नौगछिया, सोनपुर, मोकामा को लगभग 755.1 करोड़ के एसटीपी प्रोजेक्ट पूरे हो रहे हैं। इसके अलावा अन्य तीन प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। इन सभी नौ एसटीपी से प्रतिदिन 238 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी साफ होगा। पानी साफ होने के बाद इसे नदियों में नहीं छोड़ा जायेगा। एसटीपी से निकलने वाले साफ पानी को खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग किया जायेगा।

जानिए क्या है “नमामि गंगे प्रोजेक्ट”: आपको बता दें कि यह परियोजना हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख परियोजना है। इसे 2014 में शुरू किया था। यह केंद्र सरकार की योजना है। इस योजना में 2019-2020 के लिए 20000 करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे। केंद्र सरकार की तरफ से इसकी मंजूरी दे दी गई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि 2020 तक गंगा की सफाई 70 से 80% तक पूरी हो जाएगी। पर मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना पर काम धीमी गति से हो रहा है। “नमामि गंगे” के फ्लैगशिप कार्यक्रम के तहत आठ राज्यों उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में विभिन्न गतिविधियां चालू की गई थीं।

क्या है एसटीपी प्रोजेक्ट जिससे नदिया स्वच्छ हो जायेगी? आपको बता दें पूरे दुनिया में इन दिनों सभी नदियां प्रदूषित होती जा रही है। ऐसे में एसटीपी की उपयोगिता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। सबसे पहले यह जानना होगा की हमारे घरों और बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी आखिर कहां जाता है? साफ बात है, यह पानी दूषित होकर नदियां या तो तलाब में प्रवाहित होता है। और उनको दूषित कर देता है। इसको रोकने और दूषित को जल स्वच्छ करने के योग में लाने के लिए एसटीपी का प्रयोग किया जाता है। एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट इसके अंतर्गत गंदे पानी के दूषणकारी अवयवों को विशेष विधि से साफ किया जाता है। इसको साफ करने के लिए भौतिक, रासायनिक और जैविक विधि का प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से दूषित पानी को दोबारा प्रयोग में लाने लायक बनाया जाता है। और इससे निकलने वाली गंदगी का इस प्रकार शोधन किया जाता है।

ऐसे काम करता है यह मशीन: आपको बता दे की एसटीपी को ऐसी जगह बनाया जाता है। जहां विभिन्न स्थानों से दूषित जल वहां लाया जा सके। घरों और फैक्ट्रियों के दूषित जल को साफ करने की प्रक्रिया तीन चरणों में संपन्न होती है। जिसके तहत पहले, ठोस पदार्थ को उससे अलग किया जता है। फिर जैविक पदार्थ को एक ठोस समूह एवं वातावरण के अनुकूल बनाकर इसका प्रयोग खाद एवं लाभदायक उर्वरक के रूप में किया जाता है। इसके बाद उसे प्रयोग में लाने के लिए नदी, तालाबों आदि में छोड़ दिया जाता है।

बिहार में 9 एसटीपी प्लांट में तीन का निर्माण कार्य पूरा हुआ है: बता दे की वर्तमान में जिन नौ एसटीपी के पूरा होने की बात कही जा रही है। उसमें बेऊर, करमलीचक और सैदपुर एसटीपी का काम पूरा हो चुका है। मगर, इन एसटीपी से जुड़े पाइप लाइन नेटवर्क के काम अब जा कर पूरा होने की स्थिति में आये हैं। सबसे खास बात पीएम स्तर से उन सभी एसटीपी का उद्घाटन भी हो चुका है। मगर कार्य कार्य कोई भी सही ढंग से नहीं हो रहा है। अब शेष कार्य को इस वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जायेगा। वहीं, अन्य छह एसटीपी प्रोजेक्ट भी सीवरेज पाइप लाइन के साथ तैयार होंगे। ऐसे में एसटीपी का वास्तविक लाभ लोगों को मिल पायेगा और नदियों को शहर से निकलने वाले गंदे व प्रदूषित पानी से लोगों को निजात मिलेगी

इन शहरों में भी चल रहा है एसटीपी का निर्माण कार्य : बता दे की उपरोक्त उन छह प्रोजेक्ट के अलावा बख्तियारपुर में 36 करोड़, मनेर में 40.83 करोड़, छपरा में 248 करोड़, फतुहा, दानापुर व फुलवारी को मिला कर 176 करोड़ की लागत से 38 एमएमडी क्षमता वाले तीन एसटीपी भी अगले वर्ष तक बन कर तैयार हो जायेंगे। इसके अलावा पटना के दीघा में 100 एमएलडी व कंकड़बाग में 50 एमएलडी की क्षमता और दोनों की लागत 1187 करोड़ है। इनका भी निर्माण किया जा रहा है। वहीं हाजीपुर, कहलगांव, खगड़िया, मुंगेर, बक्सर व बड़हरिया में भी एसटीपी की योजना है।

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