बेगूसराय में गंगा के कटाव में कभी भी विलीन हो सकता है यह गांव, जगकर गुजर रही है रात

Ganda Katao

डेस्क : आजादी के 73 साल बाद भी दियारा इलाके के लाखों लोग अभिशप्त जिंदगी जीने को मजबूर हैं। गंगा में आई बाढ़ और कोरोना के कहर लोग अभी भूले भी नहीं थे कि अब गंगा के कटाव ने बेगूसराय के कई गांव के आस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया है। गंगा के कटाव के कारण सबसे अधिक खराब हालत तेघड़ा प्रखंड के रात गांव पंचायत स्थित भगवानपुर चक्की गांव की है। यहांं गांव से मात्र एक सौ मीटर की दूरी पर लगातार हो रहे कटाव से लोगों की नींद गायब है। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि कटाव इतने तेज गति से हो रहा है कि एक सप्ताह में गांव के कई महत्वपूर्ण स्थल गंगा में विलीन हो जाएंगे।

गंगा कटाव का क्षेत्र वर्तमान समय में उत्तर की ओर फैल रहा है। जिससे तेघड़ा प्रखंड में पिढ़ौली से बारो तक कटाव की चपेट में है, लेकिन भगवानपुर चक्की में कटाव का दबाव अधिक है। वार्ड सदस्य मो. अफजल ने बताया कि पंचायत के वार्ड संख्या 12 एवं 13 में अधिकतर संख्या अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय का है। दैनिक मजदूरी कर यह अपना जीवन यापन करते हैं। कटाव से खेत पहले ही गंगा में समा चुका है। अब घर एवं बास की जमीन पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव से मात्र सौ गज की दूरी पर लगातार हो रहे कटाव से लोग सहमे हुए हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के प्रति रोष जताते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों से लगातार कटाव हो रहे हैं।

लेकिन अब तक न तो कोई अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधि गांव पहुंचकर ग्रामीणों से हालचाल पूछा है। जनजागरण अभियान मंच के शशिभूषण भारद्वाज ने बताया कि गंगा कटाव से मात्र सौ गज की दूरी पर मस्जिद, कब्रिस्तान और गांव की आबादी है। लगभग दस हजार की आबादी पर गंगा नदी के कटाव का खतरा है और लोग भय में जीने को विवश हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अविलंब गांव पहुंच कर कटाव का जायजा लेना और सुरक्षा का उपाय करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो भय से आक्रोशित लोग प्रखंड एवं अनुमंडल कार्यालय का घेराव कर सकते हैं।

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