Begusarai news: बेगूसराय के पिपरा से पठकोल-चिल्हाई होते हुए दहिया तक की करीब 10 किलोमीटर की सड़क में दरार आ गई है. ये सड़क की दरारें अब बस झांक ही नहीं रही बल्कि यह सरकार के विकास मॉडल की सच्चाई का जीता जागता पोस्टर बन चुकी है. हर दिन, हर महीने सूबे में नई सड़कों के उद्धाटन और शिलान्यास होते हैं लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि जितनी जल्दी सड़के बनती है उससे ज्यादा तेजी से सड़कें टूट रही हैं.
यह सड़क जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं वह इतनी बुरी हालत में है कि गड्ढे गिनना नामुमकिन है. कई जगहों पर तो पूरी सड़क ही गड्ढों में तब्दील हो गई है. इस सड़क के बारे में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि यह सड़क दो विधानसभा से हो कर गुजरती है. पिपरा से चिल्हाई तक का हिस्सा तेघड़ा विधानसभा तो वहीं चिल्हाई से दहिया तक यह रोड बछवाड़ा में आता है.दोनों जगह एक ही पार्टी के विधायक हैं और राज्य में उसी पार्टी की सरकार भी है. और सड़क सालों से बदहाल है.
एक बार परिवहन मंत्री ने कहा था, ” गड्ढा दिखाओ और 5000 रुपए इनाम पाओ” . उनके बयान सड़कों पर आकर मजाक बन जाते हैं. यहां तो हालत यह है कि अगर हर गड्ढे पर 5000 रुपए मिलने लगें तो शायद पूरा जिला करोड़पति बन जाए. लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर यह हालात कब ठीक होंगे. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर रोज भारी ट्रकों की आवाजाही होती है. जब दो ट्रक आमने-सामने आते हैं, तो बाइक सवार किनारे जान बचाकर खड़े हो जाते हैं. हर लोग इसी रास्ते से गुजरते हैं चाहे वो बच्चे हो बड़े हो या बुजुर्ग हो या महिलाएं हों. हर दिन लोग हादसों को साथ ले कर चलते हैं फिर भी प्रशासन चुप है.
बड़ा सवाल ये है कि क्या सरकार सिर्फ नई सड़कों का उद्धाटन करने में व्यस्त है और विकास का मतलब सिर्फ प्रेस रिलीज और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह गया है. इसी सड़क से होकर दोनों विधायक गुजरते हैं लेकिन जनता की परेशानी उन्हें नहीं दिखती है. क्या डबल इंजन सरकार का इंजन कागज पर ही चल रही है या फिर जमीन पर.
पिपरा से दहिया तक की यह सड़क सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी नहीं है बल्कि यह सरकार के दावों और जनता की वास्तविकता के बीच की दूरी है. सवाल सीधा प्रशासन से है कि इस सड़क की मरम्मत है या फिर विकास का यह दर्द यूं ही गड्ढों में दबा रहेगा?


