बरौनी नगर परिषद में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना अब संघर्ष करने के बराबर हो चला है. दोनों प्रमाण पत्रों को बनवाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया भर नहीं रही. आम लोग इन दोनों सर्टिफिकेट्स को बनवाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. हालात इस कदर बदतर हो चले हैं कि महीनों भटकने के बाद भी लोगों के हाथ निराशा और इंतजार लगती है.
मिली जानकारी के अनुसार बरौनी नगर परिषद में 250 से अधिक जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन लंबित पड़े हैं. इसके अलावा लगभग 50 से ज्यादा सर्टिफिकेट तो करेक्शन के लिए लटके हुए हैं. इन सबों से भी ज्यादा परेशानी उन कागजों में हैं जिनका कई साल पहले डिजिटाइजेशन किया गया है. वो सैकड़ों प्रमाण पत्र जिनका पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा डिजिटाइजेशन किया गया या उससे पहले ही जारी किया गया, वो भी आज तक डिजिटल रिकार्ड में शामिल नहीं हो पाए हैं.
इतना ही नहीं, हाल के दिनों में नए आवेदनों को फर्जी बनाकर खारिज किया जा रहा है. लोगों से कहा जा रहा है कि गवाह फर्जी है. हैरानी की बात तो ये है कि जिन्हें नगर परिषद द्वारा फर्जी बताया जा रहा है उन्हें विकास मित्र द्वारा पहले ही सत्यापित किया जा चुका है. इन बातों से लोगों में भारी आक्रोश है और इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल ये है कि जब सरकारी दफ्तरों में ऐसा हाल हो तो आम लोग कहां जाएं.
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ने इस परेशानी को और बड़ा बना दिया है. कई अभिभावक अपने बच्चों का स्कूल में नामांकन तक नहीं करा पाए हैं. जन्म प्रमाण पत्र मिलने में काफी परेशानी हो रही है. लोगों का कहना है बरौनी नगर परिषद का प्रभार संभाल रहे अधिकारी सत्येंद्र कुमार नियमित रुप से कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते. लोगों को बार-बार बरौनी ब्लॉक के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
वहीं इस मामले पर वार्ड संख्या 24 के पार्षद कुमार गौतम ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. गौतम ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि नगर परिषद में सांख्यिकी पदाधिकारी की नियुक्ति तुरंत की जानी चाहिए. इस संबंध में बेगूसराय के जिला अधिकारी और तेघरा विधायक को औपचारिक शिकायत भी दी जा चुकी है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह जल्द ठीक नहीं हुआ तो जनता का आक्रोश सड़को पर दिखाई देगा.
अब सबसे बड़ा सवाल यही हैं कि क्या सरकार इस संकट को गंभीरता से लेगी या जनता यूं ही अपने अधिकार के लिए भटकती रहेगी?


