हौसलों से ही उड़ान भरी जाती है मानसी ने पैर खोया, हिम्मत नहीं, जीत लिया वर्ल्ड बैडमिंटन का गोल्ड

Manasi-Joshi-

कुदरत ने छीन लिया एक पैर पर फिर भी हार ना मानते हुए अपने सारे सपने पूरे कर जी रही है मानसी जोशी, बचपन से बैडमिंटन की शौक़ीन रहीं मानसी जोशी ने पारा वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल हासिल कर रखा है। मानसी जोशी महारष्ट्र की रहने वाली है जिनके पास एकल गोल्ड मैडल है। मानसी के पिता भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में काम करते थे, मानसी की परवरिश में भी उनके पिता ने कोई कमी नहीं छोड़ी और हर स्तर पर उनको बढ़ावा दिया। बचपन से ही मानसी बैडमिंटन खेलने लगी थी और स्कूल की प्रतियोगिताओं में अव्वल आने लगी थी।

परन्तु कुदरत को यह बिलकुल भी रास ना आया और 2011 में एक सड़क दुर्घटना में उनके पांव को छीन लिया, जिसके कारण वह 2 महीने अस्पताल में भर्ती रही, इस दौरान वह हिल डुल भी नहीं सकती थी। आपको बता दें की यह दुर्घटना ट्रक से हुइ थी, सुबह वह प्रैक्टिस के लिए निकली थी और उनकी ट्व व्हीलर की ट्रक से भिड़ंत हो गयी, आसपास के लोग उनको अस्पताल लेकर गए और वहां पर उनका ऑपरेशन हुआ पर ऑपरेशन के बाद पाँव में इन्फेक्शन हो जाने के कारण उनको टांग कटवानी पड़ी थी। इस हादसे के बाद उनका हौसला और बुलंद हो गया और उन्होंने पारा बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर नया कीर्तिमान दर्ज कर दिया। वह बताती हैं की इसका सारा श्रेय मेरी हिम्मत को जाता है क्यूंकि ऐसी स्थिति में इंसान के ऊपर होता है की वह रोये या आगे बढ़ने की सोचे, मैंने अपने आपको फिसिओथेरपी के जरिये खड़ा करा और खेल की शुरुआत कर दी।

साल 2015 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप मिक्स्ड डबल का खिताब जीता था, और इसके बाद उनकी खेल को लेकर ललक और बढ गयी फिर उन्होंने 25 अगस्त को सोने का तगमा भी हासिल कर लिया।

साल 2017 में उन्होंने कोरिया में हुयी वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी ब्रोंज मैडल जीतकर अपना और अपने देश का नाम रोशन करा।

मानसी जोशी पारा बैडमिंटन खिलाड़ी है जिसमें उन्हें महिला एकल SL3 में जीत हासिल है इसमें वह खिलाड़ी होते है जो भागने में संतुलन नहीं बना पाते हैं। बड़े कीर्ति मान स्थापित करने के बाद उनका कहना है की यह जीत किसी सपने से कम नहीं है , वह अब प्रोस्थेटिक लिंब की मदद से अपने खेल को आगे बढ़ा रही है जिसमे 5 घंटे की सख्त ट्रेनिंग मौजूद है ।

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