8 February 2023

आखिर कैसे बनते हैं सस्पेंशन ब्रिज? क्यों होते हैं आम पुल से अलग, जानें – सब कुछ

suspension bridge

रविवार को गुजरात के मोरबी से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। इस हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस हादसे में मृतकों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अब मृतकों का आंकड़ा 150-200 लोगों के करीब पहुंच गया है। ऐसे में मच्छू नदी पर बने पुल यानि सस्पेंशन ब्रिज की बात की जाए तो, क्या यह आम पुल से अलग होते है? नदी पर इनका निर्माण सुरक्षा देख कर किया था जाता है? तो चलिए आपको बताएं नदियों पर बनने वाले इन पुलों के बारे में और ये आम पुलों से कैसे अलग होते हैं।

क्या होते हैं सस्पेंशन ब्रिज : वैसे तो नदी पर या किसी भी पानी की स्त्रोत पर कई तरह के ब्रिज का निर्माण होता है। उनमें से एक होते हैं सस्पेंशन ब्रिज। आम तौर पर सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण बहाव वाले पानी के ऊपर यानी नदियों पर होता है। इन ब्रिजेस का निर्माण केबल की मदद से होता है। नदियों के किनारे आपने कई तरह के ब्रिज बने देखे होंगे।

एक होता है जिसमें नदी के दोनों किनारे पर पिलर लगए होते हैं और बाकी पुल केबल के जरिए टिका होता है। ऐसे केबल वाले पुलों में पानी के अंदर कोई भी पिलर या बेस नहीं बनता। इसे ही सस्पेंशन ब्रिज कहा जाता है। इस ब्रिज में डेक (Deck), टावर (टावर), टेंशन (Tension), फाउंडेशन (Foundation)और केबल (cable) अहम हिस्से होते हैं।

जो डेक का हिस्सा होता है, वो पुल पर बड़ी सड़क का आखिरी हिस्सा होता है। ये अंत पॉइंट होता है, जो जमीन या पहाड़ी से जुड़ा होता है। डेक के अगले हिस्से में टावर लगा होता है जो पुल को बेस देने का काम करते हैं। इसका निर्माण दोनों किनारों पर होता है। इससे ही पुल का टेंशन दोनों किनारों को जोड़ता है। टेंशन वो तार होता है, जो एक टावर से दूसरे टावर पर बंधा होता है। इससे ही केबल लगे होते हैं, जो पुल की सड़क को टेंशन से बांधे रखते हैं। जो ब्रिज का निर्माण करते है।

हैंगिंग ब्रिज भी है नाम
बता दें कि इन पलों को हैंगिंग ब्रिज भी कहा जाता है। 1800 के दशक में इस डिजाइन के पुल काफी बनाए जाते थे। चीन के Runyang Yangtze River Bridge को दुनिया का सबसे बड़ा संस्पेंशन ब्रिज माना जाता है। यदि भारत में देखे तो, यहां उत्तराखंड में Dobra-Chanti bridge सबसे बड़ा सस्पेंशन पुल यानी हैंगिंग ब्रिज है। इसके साथ ही देश में कई फेमस हैंगिंग ब्रिज शामिल है, जिनमें कोटो हैंगिंग ब्रिज, लोहित रिवर (अरुणाचल प्रदेश), लक्ष्मण झूला, वालॉन्ग, दार्जलिंग के हैं।