एक्टर नहीं बनना चाहते थे, गरीबी ने बना दिया ट्रेजेडी किंग, कभी 36 रुपये कमाते थे, अब अपने पीछे इतने करोड़ की संपत्ति छोड़ गए दिलीप कुमार

Dilip Kumar

न्यूज़ डेस्क : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें हमेशा इंडस्ट्री को सताएगी। बताते हैं कि त्रासद भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हे ‘ट्रेजडी किंग’ भी कहा जाता था। 11 दिसंबर 1922 वो दिन था। जब दिलीप कुमार का जन्म पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुआ था। और 7 जुलाई 2021 वो ऐसा तारीख है। जिसे जब भी याद किया जाएगा तो आंखें जरूर नम होंगी। ‌बता दें कि 12 भाई-बहनों में से एक दिलीप का बचपन बहुत ही तंगहाली में बीता था। दिलीप का असली नाम युसूफ खान था। तो आइए आज दिलीप कुमार के बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं।

एक्टर छोड़ बिजनेसमैन बनना चाहते थे: बता दें की दिलीप कुमार एक्टर नहीं बनना चाहते थे। दरअसल, बचपन से उनके मन में एक ही सवाल था, की बड़ा बिजनेसमैन बनेंगे। इसी को लेकर वो अपने पिता के बिजनेस में अपना हाथ बटाना चाहते थे। कुछ समय ऐसा आया कि दिलीप अपनी पढ़ाई लिखाई और कामकाज छोड़ कर फिल्म की दुनिया में आ गए। बता दें दिलीप के पिता लाला ग़ुलाम सरवर उन्हें अपना आदर्श बेटा मानते थे। मैट्रिक उत्तीर्ण करने के बाद दिलीप लिटरेचर की पढ़ाई करना चाहते थे। लेकिन, उनके पिता चाहते थे कि वो साइंस ले। पिता की बात ना टालते हुए उन्होंने साइंस ली।

यहां से शुरू हुई जिंदगी की टर्निंग प्वाइंट: दिलीप की लाइफ में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। अचानक एक ऐसा मोड़ आया कि मानो कुछ तबाह हो गया। उनके पिता का फलों का बिजनेस था धीरे-धीरे नुकसान होने लगा। जहां रोजाना चार-पांच गाड़िया भरकर फलों की सप्लाई होती थी। की अचानक हफ्ते में केवल दो ही गाड़िया फलों की सप्लाई कर पा रही थीं। गोदाम फलों से भरा हुआ था। फल गोदाम में पड़े पड़े सड़ रहे थे। ऐसे में घर की माली हालत खराब होने लगी।

कुछ दिन नौकरी भी करना पड़ा : फलों के बिजनेस में भारी नुकसान के चलते दिलीप कुमार को बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। और मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर के क्लब मैनेजर तौर पर महीने के 36 रुपए पर नौकरी की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने वहां चाय, कॉपी और सैंडविच बेचना भी शुरू कर दिया अब अपने इस काम से दिलीप कुमार को हर महीने लगभग हजार रुपये का फायदा होने लगा था।

यहां से शुरू हुई फिल्म कैरियर की शुरुआत : बता दें कि नौकरी करने के दौरान दिलीप को आजादी के समर्थन के चलते गिरफ्तार कर लिया गया। फिर वहां से मुंबई वापस आ गए। एक दिन चर्चगेट रेलवे स्टेशन पर बैठे थे। तभी उनके पहचान वाले साइकोलॉजिस्ट डॉ. मसानी मिल गए। डॉ. मसानी बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी से मिलने जा रहे थे। उन्होंने दिलीप कुमार को भी साथ में ले लिया। बता दें कि दिलीप अपने जिंदगी के दौरान आत्मकथा ‘द सबस्टैंस एंड द शैडो’ लिखते थे। वहां पहुंचने के बाद दिलीप देविका रानी से मुलाकात की। देविका रानी ने उनसे मुलाकात के दौरान उन्हें 1250 रुपए की नौकरी का प्रस्ताव दिया। साथ ही एक्टर बनने की इच्छा के बारे में पूछा। 1250 रुपए मासिक की तनख्वाह के आकर्षण ने उन्हें बॉम्बे टॉकीज का एक्टर बना दिया। यहां उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। फिर उन्होंने वर्ष 1944 में फिल्म “ज्वार भाटा” से बॉलीवुड इंडस्ट्री में कदम रख।

ऐसे हुई सायरा बनो से शादी : बता दें कि दिलीप कुमार अपने से 22 साल छोटी अभिनेत्री सायरा बानो से 11 अक्टूबर, 1966 को शादी की थी। उस दिलीप जाने माने सुपरस्टार बन चुके थे। हालांकि, सायरा तब तक हिंदी फिल्मों में न्यू कमर एक्ट्रेस थी और फिल्मों में वह अपना नाम बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। लेकिन इसके बाद भी ट्रेजडी किंग ने इन बातों का असर अपने रिश्ते पर नहीं पड़ने दिया और शायरा से शादी की।

कितने करोड़ के मालिक हैं : मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिलीप कुमार की नेट वर्थ 620 करोड़ है। दिलीप का सोर्स ऑफ इनकम एक्टिंग के जरिए ही है। बता दें कि 1950 के दौरान दिलीप कुमार 1 लाख रुपये चार्ज करने वाले पहले एक्टर थे। एक्टिंग के अलावा वह संसद के मेंबर भी रहे थे। और उन्होंने अपने कैरियर में 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते हैं। इनके अलावा साल 1994 में उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में उनका नाम सबसे ज्यादा अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने वाले एक्टर के तौर पर दर्ज है।