बेगूसराय में ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय तो बछवाड़ा सीट पर बहुकोणीय मुकाबला क्यों, पढ़ें रिपोर्ट

पोलिटिकल डेस्क : बेगूसराय जिले का बछवारा विधानसभा सीट इन दिनों बहुत ही चर्चा का का केंद्र बिंदु बना हुआ है। बेगूसराय जिले के बखरी सु , एसकमाल , मटिहानी, चेरिया बरियारपुर, तेघड़ा के सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला दिख रहा है। लेकिन बछवारा विधानसभा का सीट अभी तक के राजनीतिक अपडेट के मुताबिक बहुकोणीय मुकाबला दिख रहा है। जहां एनडीए से भाजपा के सुरेंद्र मेहता , महागठबंधन से अवधेश राय, सिटिंग विधायक पुत्र निर्दलीय शिव प्रकाश गरीबदास , निर्दलीय इंदिरा देवी, राष्ट्रीय जन जन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आसुतोष कु की पत्नी भी यहां से मैदान में है ।

सीटिंग सीट यह कांग्रेस पार्टी की है। यहां से स्वर्गीय विधायक रामदेव राय यहां से विधायक थे लेकिन महागठबंधन के राजनीतिक उलटफेर में यह सीट कांग्रेस के हाथों से निकल कर वामदलों के खाते में चला गया जिसके बाद स्वर्गीय रामदेव राय के पुत्र श्री प्रकाश गरीबदास ने निर्दलीय चुनावी समर में ताल ठोक दिया। राजनीतिज्ञ बताते हैं कि प्रकाश गरीबदास कांग्रेस के यूथ वोट व स्व राय के आधार वोट को लेकर मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशी इंदिरा देवी जो बछवारा में इनके परिवार से बीते 3 विधानसभा चुनाव में कैंडिडेट बनके आते रहे हैं जिसको लेकर इनका भी आधार वोट बैंक क्षेत्र में माना जाता है।

वहीं बात करें तो अवदेश राय पुर्व विधायक और सुरेंद्र मेहता बेगूसराय सदर विधायक थे इन दोनों को गठबंधन में अंदर के भीतर घात और मौकापरस्त नेताओं के घात से अगर बच गए तो दोनों अभी मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं लेकिन कौन किस पर भारी पड़ते हैं यह तो चुनाव की रात ही पता चल पाएगा लेकिन बछवारा विधानसभा की अगर बात करें तो यहां पर अभी तक स्टार प्रचारकों की कमी खल रही है। महागठबंधन के तरफ से कन्हैया कुमार ने यहां पर महागठबंधन प्रत्याशी के लिए वोट मांगा है

यह सब है मुख्य समस्याएं बछवाड़ा विधानसभा के मुख्य मुद्दा की बात करें तो यहां बछवारा रेलवे स्टेशन का विकास डिग्री कॉलेज की स्थापना , चमथा दियारा को प्रखंड बनाने को लेकर सहित कई आदि मूलभूत समस्याएं हैं बीते 20 साल में अगर बात करें तो बछवारा में राजनीतिक उठापटक होते रहा है भारतीय जनता पार्टी ने 2010 के विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में हुई भूल के चलते आज तक इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए संघर्ष कर रही है। 2020 में बछवाड़ा का ताज किसके सर सजेगा अब यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा।