4 February 2023

राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी ट्रेनों का किराया होगा कम! रेल मंत्री ने दी बड़ी जानकारी

indian train

डेस्क : ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए एक अहम खबर है। सरकार अब यात्रियों के लिए एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। दरअसल, कोरोना काल के बाद रेलवे ने काफी बदलाव किए हैं। अभी तक कोरोना काल से पहले ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाली कई रियायतें बहाल नहीं की जा सकी हैं, जिससे ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में भी काफी कमी देखने को मिली है।

कम होगा प्रीमियम ट्रेनों का किराया! : अब रेलवे यात्रियों को लुभाने के लिए राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में डायनेमिक किराया खत्म करने पर विचार कर रहा है। दरअसल, रेल मंत्री ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। लोकसभा में एक सवाल पूछा गया कि क्या नकारात्मक प्रतिक्रिया और यात्रियों की संख्या में कमी को देखते हुए सरकार डायनेमिक फेयर सिस्टम को वापस लेने पर विचार किया जा रहा है? इसके जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि फिलहाल सरकार की फ्लेक्सी फेयर पॉलिसी को वापस लेने की कोई योजना नहीं बन रही है।

रेल मंत्री ने दी जानकारी : रेल मंत्री ने कहा,’रेलवे डायनेमिक फेयर सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें मांग के मुताबिक किराया तय किया जाता है। इसके तहत 10 फीसदी सीटों की बुकिंग से किराए में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है। जैसे-जैसे सीटों की संख्या घटती जाती है, किराया बढ़ता जाता है। हालांकि, यह सभी प्रकार की ट्रेनों में लागू नहीं है। यह व्यवस्था राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में 9 सितंबर 2016 को लागू की गई थी। लेकिन अब कई रूटों पर रेल किराया हवाई जहाज से भी महंगा हो गया है। इससे समय और पैसे दोनों में किफायती होने के कारण लोगों ने हवाई यात्रा करना शुरू कर दिया है, जिससे रेलवे के यात्रियों की संख्या में कमी आई है।

रेल यात्रियों की संख्या में कमी : रेल मंत्री ने जानकारी दी है कि प्री-कोरोना काल में फ्लेक्सी फेयर सिस्टम में पैसेंजर और ट्रेनों से होने वाली कमाई नॉन-फ्लेक्सी से ज्यादा थी, लेकिन सरकार की इस नीति को वापस लेने पर अभी कोई विचार नहीं है. नहीं कर रहा है। रेल मंत्री ने कहा, ‘रेलवे और एयरलाइंस परिवहन के दो अलग-अलग साधन हैं। वॉल्यूम, कनेक्टिविटी और सुविधा के लिहाज से इनकी तुलना नहीं की जा सकती है। एयरलाइंस में अधिकतम किराए की कोई सीमा नहीं है जबकि रेलवे ने पूरे साल के लिए अधिकतम किराया तय किया है। एयरलाइंस का किराया कई कारकों पर निर्भर करता है। रेलवे का किराया एयरलाइन से कम या ज्यादा हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस श्रेणी में यात्रा कर रहे हैं। यह यात्री को तय करना है कि रेलवे या एयरलाइंस से यात्रा करनी है चाहते है या नही।