बेगूसराय में गेहुँ की बाली में नहीं है दाना, किसान हो रहे हैं परेशान

Kishan Preshan

न्यूज डेस्क : बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड क्षेत्र के एकम्बा पंचायत के दर्जनों किसानों के गेहूं की बाली में दाना नहीं लगने की शिकायत लगातार आ रही है। या यूँ कहें कि गेहूं के बाली की दाना कुपोषित हो गयी है।गेहुँ की दाना में बाली नहीं आने से प्रभावित दर्जनों किसानों के उस वक्त होश उड़ गये। जब पके हुये गेहुँ के बालियों का छोटा आकार और उसमें चेक करने पर दाना नहीं निकल पाया। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार एकम्बा पंचायत के ही एक किसान ने पिछले वर्ष भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इंदौर से दो क्विंटल ब्रीडर सीड एचआई 8663 लेकर आये। उस किसान ने अपने खेतों में लगभग पाँच बीघा में गेहुँ लगाया और किसानों में प्रसार प्रचार भी खूब किया।

इस वर्ष 2021 में पंचायत और पंचायत के बाहर के किसानों में इस बीज यानी गेहूं के फाउंडेशन सीड को महंगे दर पर बेचा।किसानों ने इस उम्मीद से इनके बीजों को खरीदा कि सचमुच किसानों की आमदनी डबल हो जायेगी।खेतों में गेहुँ बोआई के बाद जैसे-जैसे समय बीतता गया। किसानों को फसल देखकर संतोष होता रहा कि फसल अच्छी है।जब गेहूं के फसल में बाली आयी तो उसमें बाली इतनी छोटी थी। जिसे देखकर किसान परेशान होने लगे,और जब बाली पक कर तैयार हुयी तो मानो किसानों के पैर के नीचे जमीन खिसक गयी। गेहुँ के पौधे के बालियों में दाना का बिल्कुल अभाव दिखा। कहीं किसी खेत में दाना भी है तो इतना छोटा कि वह खाने लायक नहीं है।इस बावत पंचायत के किसानों ने पंचायत कृषि कार्यालय एकम्बा के किसान सलाहकार के माध्यम से लिखित शिकायती आवेदन बीएओ छौड़ाही को दिया है।दिये गये आवेदन में एकम्बा के प्रगतिशील किसानों ने बताया है कि हमें इस गेहूं के बारे बताया गया कि अन्य किस्मों की तुलना में अधिक उपज देगा।

इसके अलावा अपेक्षाकृत जल्दी तैयार होगा।गर्मी भी आसानी से सह सकता है।मध्य प्रदेश इस गेहूं का हब बना हुआ है।एकंबा पंचायत भी इस गेहूं का हब बने 1000 से 2000 क्विंटल पैदा होने पर बड़े बाजार के व्यापारी को बुलाया जा सके और यह भी कहा गया यह गेहूं बाजार में ऊंचे दर पर बिकेगा।शिकायती आवेदन देनेवाले किसानों ने बताया कि गेहुँ के बारे में मध्य प्रदेश के कृषि वैज्ञानिक डॉ दिलीप कुमार वर्मा बिडर साइंटिस्ट का भी हवाला दिया गया।इस बीज के संबंध में जहां से उन्होंने यह बीज मंगाया था।किसानों का कहना है कि इस बीच बीज बेचने वाले किसान की तरफ से कोई संवेदनशीलता नहीं दिखायी जा रही है कि किसान को उनके क्षति की भरपायी कैसे हो?किसानों के दनने उत्पादित गेहुँ की फसल को देखकर कलजा फट रहा है।

जिन किसानों ने उक्त गेहुँ का बीज अपने खेतों में लगाया और भुक्तभोगी के शिकार हुये उसमें किसान सह एकम्बा पंचायत के वर्तमान मुखिया राजेश कुमार सिंह एवं पूर्व सरपंच विजय कुमार सिंह प्रगतिशील गणेश सिंह,दीपक कुमार सिंह,पंकज कुमार सिंह,फुलेना यादव,रामप्रकाश यादव,संकेत कुमार,प्रदीप दास,विजय कुमार रजक,संजू देवी,राम ज्योति देवी,राम उदगार पासवान,डोमनी देवी,सुमित्रा देवी,अरहुल देवी,व्यरथ यादव,राम सजीवन चौधरी के नाम शामिल हैंं।किसानों से प्राप्त आवेदन को स्थानीय विभागीय अधिकारियों से लेकर कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को भेजा गया है।

किसानों द्वारा पंचायत कृषि कार्यालय को प्राप्त आवेदन को प्रखंड कृषि पदाधिकारी छौड़ाही के अलावा जिला कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर के वैज्ञानिक,जिला कृषि पदाधिकारी,जिला पदाधिकारी बेगूसराय,निदेशक जनरल आईसीआर नई दिल्ली समेत कई महत्वपूर्ण कृषि संस्थानों को भेज दिया गया है।इसके साथ ही कृषि विभाग के विशेषज्ञों से अनुरोध किया गया है कि पंचायत में प्रभावित किसानों के फसल को देखकर पता लगाया जाये कि किस वजह से यह बीज प्रभावित हुआ,और किसानों के खेत में उक्त गेहुँ का उपज नहीं हो सका।

अनिश कुमार किसान सलाहकार एकम्बा छौड़ाही कार्यक्षेत्र का मामला है,स्वयं खेतों का निरीक्षण कर किसान हित में समुचित कदम उठाये जायेंगें। हमलोग विभागीय तौर पर किसानों को बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड का बीज उपलब्ध कराते हैं। कोई किसान बाहर से बीज लाकर उपजाया हो,और फिर दोबारा किसानों को बीज दे दिया हो।ऐसे में विभाग की कोई कमी नहीं है। चुँकि विभागीय बीज बीजीएम द्वारा भेजा है।जिसे किसानों को दिया जाता है। फिर भी उत्पादन फेल हुआ है तो किन कारणों से इसका किसानों के खेतों का स्वयं निरीक्षण कर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद इंदौर के निदेशक को किसानों के शिकायती आवेदन और वस्तुस्थिति से विभाग के वरीय पदाधिकारियों को अवगत कराकर समुचित कदम उठाये जायेंगें।हरेक प्रदेश में जलवायु और मौसम के आधार पर किसी भी फसल का उत्पादन निर्भर करता है।

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