भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाया जाना अति आवश्यक

New Education Policy

छौड़़ाही (बेगूसराय) : राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा । उक्त उद्गार भाजपा समस्तीपुर के जिलाध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सुंदरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर बटहा में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति बिषय के संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किया। अतिथियों द्वारा मंत्रोच्चार सहित दीपप्रज्वलन से कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। मीडिया प्रभारी विजयव्रत कंठ ने अतिथियों का परिचय कराया।

विषय प्रवेश कराते हुए प्रधानाचार्य देवानंद दूरदर्शी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाया जाना अति आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि शिक्षा पदाधिकारी राजकिशोर चौधरी ने प्राचीन गुरुकुल परंपरा से लेकर वर्तमान संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति के दुष्प्रभाव को दूर करके नये समर्थ भारत का निर्माण ही इसका लक्ष्य है। पूर्व प्रधानाध्यापक जयकृष्ण प्र सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे भारत के इतिहास में क्रांतिकारी कदम बताया। विद्या भारती के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सह न्यासी जयप्रकाश वर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारतीय संस्कृति से देशवासियों को जोड़नेवाला बताया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सरस्वती विद्या मंदिर रोसड़ा के सचिव अर्धेंदु शेखर ने कहा कि भारत के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।

जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति से सुधारा जा सकेगा। ताकि आनेवाली पीढ़ियों को गौरवशाली अतीत की जानकारी मिल सकेगी। प्रवक्ता कौशल पाण्डेय ने राष्ट्रीय शिक्षा की सराहना करते हुए इसे भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने वाला करार दिया। विषिश्ट अतिथियों अनीश राज,प्रो संतोष कुमार राय,प्रो विजय किशोर सिंह,प्रभारी प्रधानाचार्य विष्णुदेव महतो, दिनेश मंडल,रविरोशन कुमार, जगमोहन चौधरी सहित कई शिक्षाविदों ने संगोष्ठी को संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए रामकृष्ण एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भारत के नवनिर्माण में मील के पत्थर की संज्ञा दी। आगत अतिथियों का अभिनंदन पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र , दैनंदिनी एवं लेखनी प्रदान कर किया गया। मौके पर विद्यालय परिवार के सदस्यों के अलावा कई शिक्षाप्रेमी मौजूद थे ‌।

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