नवरात्रि के समापन के साथ ही आज मनाया जा रहा है विजयादशमी का त्योहार

Dussehra 2021

डेस्क : अश्वनी मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भारतीय संस्कृति में विजयादशमी का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि की समाप्ति के तुरंत बाद विजयादशमी मनाया जाता है। इस त्यौहार को दसहरा भी कहते है।

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श्री राम के विजय की ख़ुशी को मनाने के लिए मनाया जाता है दसहरा

दसहरा या विजयादशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। जब रावण भगवान श्री राम की पत्नी माता सीता का अपहरण करके लंका लेकर चला गया था तब भगवान श्री राम ने देवी शक्ति की भी आराधना की थी और नवरात्रि के बाद दसवीं तिथि को रावण का वध किया था। इसीलिए श्री राम की विजय के प्रतीक के रूप में इस पर्व को विजयादशमी कहा जाता है। यह पर्व बुराई पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है।

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रामलीला, रावण दहन तथा भव्य मेलो का आयोजन किया जाता है

दसहरा में बड़े बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। हालांकि पिछले दो वर्षों से कोरोना की वजह से बड़े स्तर पर कहीं भी आयोजन नहीं किया जा रहा है। रामलीला का आयोजन भी दसहरे का मुख्य आकर्षण रहता है। रावण,कुम्भकर्ण एवं मेघनाद का पुतला बनाकर जलाया जाता है। और ऐसी मान्यता है कि पुतलों के साथ ही समाज की सारी बुराइयां और नकारात्मकता जल जाए।

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भारतीय सांस्कृति हमेसा से ही वीरता व शौर्य समर्थक रही है। इसीलिए क्षत्रिय समाज में आज शस्त्र पूजा की जाती है। साथ ही कई जगहों ओर शक्ति प्रदर्शन भी होता है। हिन्दू समाज में विजयादशमी अत्यंत शुभ दिन माना जाता है।

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विजयादशमी बुराई पर अच्छाई तथा पाप पर पुण्य की विजय की शिक्षा देता है। इसीलिए हम सब को भी अपनी बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को अपनाना चाहिए तभी त्यौहार को मनाने का अर्थ सार्थक होगा।

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