आज है नवरात्रि का सातवां दिन जानें माता का नाम और पूजा की विधि

डेस्क : आज नवरात्रि का 7 वां दिन है और जैसा की हम सब जानते हैं की नौरात्रि के नौ दिन हिन्दू धर्म के मुताबिक़ बेहद ही लाभप्रद माने जाते हैं। आज के दिन दुर्गा माँ का सातवां रूप अवतरित होता है। अगर आप माता के इस स्वरूप की पूजा करते हैं तो सभी पापो से मुक्त हो जातें हैं। अगर आप आज के दिन माँ को याद करते हैं तो आपके अंदर के सारे दोष ख़तम हो जाते हैं और आप अपना एक कदम मुक्ति की और बढ़ा लेते हैं। इस समय माँ के आसपास काफी काला अन्धेरा होता है जिस वजह से माँ को कालरात्रि कहा जाता है। इनका रूप अत्यंत भयानक और तीन गोल आँखें से रहित होता हैं।

इस दिन भ्रमांड की सारी शक्तियां सिद्धियों का द्वार खोल देती हैं। जो साधक विधिपूर्वक माता की उपासना करता है उसे यह सिद्धियां प्राप्त होती है। कहानियों के मुताबिक चण्ड-मुंड और रक्तबीज नाम राक्षसों ने भूलोक पर हाहाकार मचा दिया था तब देवी दुर्गा ने चण्ड – मुंड का संहार किया परन्तु जैसे ही उन्होंने रक्तबीज का संहार किया तब उनका रक्त जमीन पर गिरते ही हज़ारों रक्तबीज उतपन्न हो गए। तब इन नए रक्तबीजों के विनाश के लिए माँ ने अपना कालरात्रि रूप लिया था।

माँ की पूजा की विधि

हमें माँ की पूजा और आराधना में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़नी चाहिए। माँ कालरात्रि को गुड़हल का पुष्प चढ़ाना चाहिए। कलश पूजन करने के बाद माता के समक्ष  दीपक जलाकर और पास में रोली रखनी चाहिए, अक्षत से तिलक कर पूजन करना चाहिए और मां काली का ध्यान कर वंदना श्लोक का उच्चारण करने से मन की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। तत्पश्चात मां का स्त्रोत पाठ करना चाहिए। पाठ समापन के पश्चात माता को गुड़ का भोग लगाना चाहिए तथा ब्राह्मण को गुड़ दान करना चाहिए।