आज से मांगलिक कार्य पूर्णतः ठप, चार महीने भगवान रहेंगे शयन अवस्था में

Lord Vishnu

न्यूज डेस्क : अगले चार महीने तक हिन्दू रीति रिवाज से होने वाले सभी मांगलिक कार्य पूर्णतः ठप रहेंगे । जो कार्तिक शुक्ल पक्ष देवउत्थान एकादशी के बाद प्रारंभ हो सकेंगे । मान्यता के अनुसार इन चार महीनों के समय भगवान विष्णु के शयनकाल का समय होता है। मंगलवार से भगवान श्री हरि चार महीनों तक शयन अवस्था में रहेंगे ।

धर्मशास्त्र,पौराणिक कथा एवं सनातन मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु इस सृष्टि के सभी चर – अचर जीवों के पालनकर्ता हैं। भगवान विष्णु जिन्हें नारायण के भी नाम से पुकारा जाता है और जिन का निवास स्थान छीर सागर ( दूध के समुद्र ) है। वे वहीं निवास करते हैं । भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन में रहते हैं। शयन काल का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है । इसलिए हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन से भगवान विष्णु के शयन अवस्था में होने के कारण इस दिन से लेकर कार्तिक मास के देव उत्थान एकादशी तक सभी मांगलिक कार्य बंद रहते हैं।

आज है हरिशयनी एकादशी व्रत : आचार्य अविनाश शास्त्री के बताते हैं कि वैष्णव पंथ के अनुयाई एवं भगवान विष्णु के भक्तों के लिए हरिशयनी एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार जब दो महीने बीत जाएंगे अर्थात भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे हरिपार्श्वनी एकादशी वह आएगी, इस एकादशी के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु निंद्रा अवस्था में ही एक करवट लेते हैं एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के प्राप्त होने पर चातुर्मास समाप्त होता है। अर्थात भगवान विष्णु अपने चार महीने की नींद को पूरा करके जगते हैं, जिसे देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस चार महीनों में वैष्णव लोग चातुर्मास व्रत रखते हैं । सन्यासी बैरागी अपने आश्रम को छोड़कर अन्यत्र यात्रा नहीं करते हैं और भगवान के सोए रहने पर षोडश संस्कार यथा मुंडन उपनयन विवाह वेद आरंभ कर्ण छेदन नामकरण आदि संस्कार वर्जित रहते हैं।

रामचरित मानस में है उल्लेख : उक्त चतुर्मास के संदर्भ में रामचरितमानस में भी दृष्टांत आया है कि भगवान रामचंद्र जब माता सीता की खोज में निकले थे तब आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात हरिशयनी एकादशी आने पर उन्होंने युद्ध विजय एवं माता सीता की खोज के अभियान को रोक दिया था । और देवोत्थान एकादशी के पश्चात ही पुनः माता सीता की खोज लंका विजय आदि के लिए आगे बढ़े थे।

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