9 सितम्बर को होगा हरितालिका तीज एवं 10 को होगा चतुर्थी चंद्र पूजन चकचन्दा, जानें पौराणिक कथा व पूजन विधि

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न्यूज डेस्क : स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य देने वाला व्रत “हरितालिका तीज व्रत” इस वर्ष 9 सितंबर 2021 को होगा। ज्योतिषाचार्य अविनाश शास्त्री कहते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर सूर्योदय काल में तृतीया तिथि हो एवं सूर्यास्त के समय चतुर्थी तिथि का प्रवेश हो तो हरितालिका तीज व्रत एवं चतुर्थी चंद्र पूजन एक ही दिन होता है परंतु इस वर्ष 9 सितंबर 2021 दिन बृहस्पतिवार को 51 दंड 26 प्ल यानी कि रात्रि 2:22 तक तृतीया तिथि है इसलिए दूसरे दिन अर्थात 10 सितंबर 2021 दिन शुक्रवार को चतुर्थी चंद्र पूजन अर्थात चरचंदा होगा। शुक्रवार 10 सितंबर 2021 को उदय कॉलेज चतुर्थी तिथि है एवं रात्रि 12:20 तक चतुर्थी तिथि का भोग हो रहा है यानी सूर्यास्त का काल मे चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि बीतेगी इसलिए शास्त्र सम्मत 9 सितंबर 2021 को हरितालिका तीज व्रत एवं 10 सितंबर 2021 को चतुर्थी चंद्र चरचंदा होगा।

क्या है पौराणिक कथा एक बार पर्वतराज हिमालय के दरबार में नारद ऋषि पार्वती से विवाह का प्रस्ताव लेकर आए थे। नारद ने पर्वतराज से अपनी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु से करने का प्रस्ताव रखा जिस पर पार्वती के पिता पर्वतराज हिमालय ने अपने स्वीकारोक्ति देदी। जब यह बात पार्वती को पता चला तो वह घर छोड़कर निर्जन वन में चली गई क्योंकि पार्वती ने मन ही मन शिव को अपना पति मान चुकी थी। पार्वती के पिता उनके इच्छा के विपरीत पार्वती का विवाह विष्णु से करने हेतु प्रण कर रखा था। पार्वती के घर छोड़कर निर्जन जंगल में जाने के कारण पर्वतराज बहुत दुखी हुए इधर-उधर खोजने के बाद जब अपनी पुत्री को नहीं देखा तब इस चिंता में दुखी हो गए कि अब भगवान विष्णु को क्या प्रतिउत्तर देंगे और मूर्छित हो गए और इधर पार्वती अपने घर को छोड़कर अपनी सखी के साथ जंगल में एकांत स्थान पर बिना कुछ खाए पिए अपने मन में माने हुए पति शिव की पूजा जंगल के फल-फूल आदि से किया।

वह दिन जिस दिन पार्वती जीने भूल बस या प्रमाद वस बिना कुछ खाए पिए शिव की आराधना करते हुए रात्रि जागरण किया सौभाग्य से वह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी और उस दिन हस्त नक्षत्र बीत रहा था । यह सभी व्रतों में उत्तम व्रत है इस व्रत के प्रभाव से शिव का आसन ढोला और तत्क्षण से उस स्थान पर उपस्थित हुए जहां पार्वती ने अपने सखियों के साथ शिव की थी और पार्वती से वर मांगने को कहा,जिस पर पार्वती ने कहा कि हे महादेव अगर आप पसंद है तो आप मेरे स्वामी पति हो और मैं आपकी पत्नी। तब शिव ने तथास्तु कह कर अंतर्ध्यान हो गए। उधर पर्वतराज अपनी पुत्री को ढूंढते ढूंढते उस स्थान पर पहुंचे जहां वह पूजन तिथि और पर्वतराज ने अपनी पुत्री से महल छोड़ जंगल आने का कारण पूछा तब पार्वती ने सभी कारण को बताया कि आप मेरा विवाह विष्णु के साथ करना चाहते थे लेकिन मैं मन ही मन शिव को अपना पति मान चुकी थी इसलिए मैं घर छोड़कर इस एकांत जंगल में देह त्याग करने के लिए आए हो तब पर्वतराज ने अपने पुत्री को घर लाये और पार्वती का विवाह शिव के साथ हुआ।

क्या है शास्त्री की मान्यता शास्त्र की मान्यता के अनुसार भाद्र शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि हस्त नक्षत्र युक्त होने पर सौभाग्यवती स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखना चाहिए।यह व्रत सभी व्रतों में उत्तम है। हरितालिका व्रत के दिन जो औरत भोजन करती हैं उन्हें कई जन्मो तक वैधव्य का दुख भोगना पड़ता है

कैसे करें पूजन हरितालिका व्रत के 1 दिन पूर्व एक बार भोजन करते हुए सात्विक जीवन आहार व्यवहार के साथ व्रत के निमित्त शरीर को तैयार करें तथा हरितालिका व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नदी तालाब जलाशय अथवा घर में ही स्नान करना चाहिए उसके बाद तिल जल लेकर व्रत का संकल्प करें। प्रदोष काल में मिट्टी के शिव पार्वती सहित शिव परिवार की प्रतिमा बनाकर बेलपत्र फूल उत्तम निवेद्य फल मेवा मिष्ठान आदि का भोग लगाते हुए शिव पार्वती का पूजन करना चाहिए। वस्त्र आभूषण इत्यादि अर्पित करते हुए अखंड सौभाग्य एवं धन-धान्य सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हुए रात भर जागरण करते हुए शिव के नामों का संकीर्तन भजन इत्यादि करना चाहिए । व्रत के दूसरे दिन प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर ब्राह्मण को दक्षिणा इत्यादि समर्पित करने के बाद भोजन पारण करना चाहिए।

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