28 January 2023

गर्व! पिता चलाते हैं टेम्पो..माँ करती है मजदूरी..बेटी बनी गाँव की पहली महिला डॉक्टर..

गर्व! पिता चलाते हैं टेम्पो..माँ करती है मजदूरी..बेटी बनी गाँव की पहली महिला डॉक्टर.. 1

डेस्क : मेहनत और संघर्ष जीवन की वे सीढियाँ हैं, जिनकी चढ़ाई करना बिल्कुल भी आसान नहीं होता है। लेकिन जो भी इंसान इन सीढ़ियों को पार कर जाता है, उसे सफलता हासिल करने से कोई भी नहीं रोक सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजस्थान की एक लड़की ने, जो कि बहुत जल्द गाँव की पहली महिला डॉक्टर बनने जा रही है।

टेम्पो चालक की बेटी बनेगी अब डॉक्टर

हम जिसकी बात अपने लेख में कर रहे हैं उसका नाम नाज़िया (Nazia) है, जो राजस्थान के झलावर ज़िले के पचपहाड़ गाँव से वह ताल्लुक रखती हैं। नाज़िया ने हाल ही में NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर 668वां रैंक हासिल किया है, जिसकी वजह से उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला भी मिल जाएगा

नाज़िया के पिताजी जिनका नाम इसामुद्दीन पेशे से एक टेम्पो चालक हैं, जबकि उनकी माँ अमीना बी गाँव में दूसरे लोगों के खेतों में मजदूर का काम करती हैं। नाज़िया के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी, लेकिन इसके बावजूद भी उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कोई भी कमी नहीं आने दी।

पढ़ाई लिखाई में बड़ी अच्छी थी नाज़िया

नाज़िया बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी ज्यादा अच्छी थी, इसलिए उनके माता-पिता को उनकी प्रतिभा पहचानने में ज्यादा समय नहीं लगा। नाज़िया को सरकार की तरफ नौवीं कक्षा में एक साइकिल मिली थी, जिसकी बदौलत वह गाँव से स्कूल तक की दूरी आसानी से तय भी कर पाती थी। नाज़िया के लिए पैदल गाँव से स्कूल जाना इतना आसान नहीं होता, इसलिए वह साइकिल को अपनी सफलता में काफी अहम मानती हैं।

इसके बाद नाज़िया ने दसवीं कक्षा में अच्छे अंक भी प्राप्त किए, जिसकी बदौलत उन्हें सरकार की तरफ से एक स्कॉलरशिप दी गई थी। वहीं नाज़िया ने बारहवीं कक्षा में 90 फीसदी अंक हासिल किए थे, जिसके बाद उन्हें कोटा के Allen Institute में दाखिला भी मिल गया था। स्कॉलरशिप की ही वजह से नाज़िया की पढ़ाई लिखाई का खर्च आसानी से निकल जाता था, जिसके लिए नाज़िया राज्य सरकार का भी धन्यवाद करती हैं