वाराणसी को मिली रुद्राक्ष की सौगात, जानिये कैसे जापान और भारत की दोस्ती की नई भेंट है रुद्राक्ष

-rudraksh-

न्यूज डेस्क : शिव की काशी जो न कभी रुकती न कभी थकती बस हमेसा संयमित रहकर सृजन की धारा का बहाव करती है। इसी काशी को गुरुवार की दोपहर मिला रुद्राक्ष का साथ जो अब यहाँ की प्रतिभाओं को एक मंच देगा। काशी के प्राचीन स्वरूप का आधुनिक श्रृंगार “रुद्राक्ष कन्वेंशन सेन्टर”।

क्या है ख़ास रुद्राक्ष कन्वेंशन सेन्टर में वाराणसी के सिगरा में बना रुद्राक्ष कन्वेंशन सेन्टर 2.87 हेक्टयर भूमि पर बनाई गई दो मंजिला संरचना है। जिनसे 1200 लोगो के एक साथ बैठने की क्षमता है। कन्वेंशन सेन्टर पूरी तरह से वातानुकूलित है। बड़े हॉल के अलावा 150 लोगो की क्षमता वाला एक मीटिंग हॉल भी है। इसमें दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल भी रखा गया है। 110 किलोवाट की ऊर्जा का सोलर प्लांट लगाया गया है और सेन्टर में एक जापानी बाग भी बनाया गया है। सबसे खास बात इस कन्वेंशन सेन्टर की है कि ये शिवलिंग के आकार का है। उद्घाटन के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने परिसर में एक रुद्राक्ष का पौधा भी लगाया।

काशी धर्म, आध्यात्म, कला और संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है अब ऐसे में यहाँ की प्रतिभाओं के लिए रुद्राक्ष का मिलना अदभुत बात है जो उन्हें न सिर्फ एक राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर और भी पहचान देगा क्योकि भविष्य में यहाँ अंतराष्ट्रीय आयोजन होने की भी पूरी संभावना है। रुद्राक्ष कंवेंशन सेन्टर न सिर्फ वाराणसी के लिए सौगात है बल्कि भारत और जापान के बीच गहरे मधुर रिश्ते की पहचान भी है क्योंकि रुद्राक्ष सेन्टर को डिज़ाइन जापानी कंपनी ओरिएंटल कंसलटेंट ग्लोबल ने किया है। इसका निर्माण भी जापान की फुजिता कारपोरेशन कंपनी ने किया है। वर्ष 2015 में जब तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे वाराणसी आए थे तभी सेन्टर का खाका बना था और स्मार्ट सिटी योजना के तहत इसका निर्माण 2018 में शुरू हुआ। उद्घाटन के वक़्त जापानी राजदूत सतोषी सुजुका ने भी आकर जापान का प्रतिनिधित्व किया। दुनिया का सबसे प्राचीन और जीवंत शहर काशी अब जापान के साथ अपने रिश्ते कि मजबूती को लिए कला संस्कृति का प्रतीक रुद्राक्ष के साथ दुनिया के सामने नए आयाम बनाएगा।

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