हौसले का हुनर-पाई पाई को मोहताज रहने वाली रूमा देवी ने तय किया झोपड़ी से यूरोप तक का सफर, 22000 महिलाओं को दी “नौकरी”

rooma devi succes story

डेस्क : भारत में राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां पर 50% से कम महिलाओं की आबादी है। यह उम्मीद कम ही लगाई जाती है कि इतनी कम आबादी वाले देश से कोई महिला उद्यमी निकलेगी और वह अपना और अपने परिवार का नाम रोशन करेगी। राजस्थान की महिलाओं की मेहनत और हिम्मत मिसाल बनकर समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनती है। वह इतनी शिद्दत और लगन के साथ काम करती है कि पुरुष वर्ग को भी उनके साथ आकर उनको उनका हाथ बटाना पड़ता है। राजस्थान में कई गांव ऐसे हैं जहां पर सरकार की सुविधाएं नहीं पहुंच पाई है। आज हम आपको ऐसी ही एक महिला के बारे में बताने वाले हैं जिसने झोपड़ी से विदेश तक का सफर तय किया है। इस महिला का नाम रूमा देवी है।

जब आप रूमा देवी की पिछली तस्वीरें देखेंगे और आज की तस्वीरें देखेंगे तो आपको यह अंदाजा नहीं होगा कि यह दोनों एक ही महिला की तस्वीरें हैं। बता दें कि पहले वह एक-एक रुपए की मोहताज हो गई थी लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और वह मेहनत करती चली गई। उन्होंने अपना हौसला कभी कम नहीं होने दिया था, जिसके चलते अब वह अपने साथ-साथ 22 हजार और गरीब महिलाओं को रोजगार दे रहीं हैं। वह राजस्थान के बाड़मेर जिले की रहने वाली है। बता दें कि उनकी शादी बचपन में हो गई थी, जिसके चलते वह बाल विवाह की कुप्रथा का दर्द भी जेल चुकी है। ऐसे में उनके बचपन के सपने बचपन में ही खत्म हो गए थे। लेकिन, अब उन्होंने अपने तरीके से अपनी जिंदगी जीनी शुरू कर दी है।

वह अपने हाथों से कुर्ता, चादर और साड़ी जैसे अलग अलग चीज़ें तैयार कर सकती हैं और उनको पाकिस्तान की सीमा पर जाकर बेच भी सकती हैं। अपनी इस कला की वजह से वह 75 गांव की महिलाओं को रोजगार दे रहे हैं। उनके हाथों से बनाए गए कपड़े देश विदेश में सप्लाई होते हैं। जब वह मात्र 5 वर्ष की थी तो उनकी माता जी का देहांत हो गया था। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया बता दें कि उनके पिताजी का नाम खेताराम था और मां का नाम इमरती देवी। उनके अलावा घर में आठ भाई बहन और भी है जिसके चलते वह अपने चाचा के घर पर पली-बढ़ी थी। ऐसे में उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव की सरकारी स्कूल से हुई थी, गांव के सरकारी स्कूल में उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी।

जहां पर वह रहती है, वहां पर पानी की समस्या अक्सर बनी रहती है, बाड़मेर की जमीन में काफी कम पानी है जिसके चलते उन्होंने एक बैलगाड़ी रखी और बैलगाड़ी की मदद से वह रोजाना 10 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाती थी। वह राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ गई थी, जो एक तरह का एनजीओ है। एनजीओ से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। जब वह एनजीओ से जुड़ी तो वहां पर महिलाओं को अलग अलग तरह का काम सिखाया जाता था। ऐसे में जिस एनजीओ में यह बताया जाता था कि कौन से ऐसे प्रोडक्ट है जिनकी डिमांड मार्केट में है जिसके चलते रूमा देवी ने खूब मेहनत की और फिर उनको अपने एनजीओ का अध्यक्ष बना दिया गया। इस एनजीओ में ज्यादातर महिलाएं काम करती हैं, जो हस्तशिल्प कार्य करने में सक्षम है। वह अपने घर से ही सारे प्रोडक्ट बना देती है और फिर एनजीओ को पहुंचा देती है।

रूमा देवी को कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। साथ ही वह टीवी शो पर भी आ चुकी है, उनके नाम नारी शक्ति पुरस्कार है। नारी शक्ति पुरस्कार एक ऐसा पुरस्कार है जो भारत की महिलाओं को दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। अमिताभ बच्चन के साथ कौन बनेगा करोड़पति रियलिटी शो में भी आ चुकी है बता दें कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बच्चों को पढ़ाने के लिए भी रूमा देवी को बुलाया गया था।

वह देश विदेश के ट्रिप भी कर चुके हैं। विदेशी ट्रिप में वह यूरोप गई थी और कुछ वक्त उन्होंने जर्मनी में भी बिताया था।जब रूमा ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर किया तो उन्होंने लिखा कि जिस तरीके से राजस्थान में रेत जमा हो जाती है उस तरीके से यहां पर बर्फ जमा हो जाती है। उनके नाम पर किताब भी छप चुकी है जिसका नाम ” हौसले का हुनर ” इस किताब में उनके पूरे जीवन संघर्ष की कहानी लिखी हुई है।

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