कोयले की कमी से देश में छाया बिजली संकट, बिहार में पांच गुना बढ़ा प्रति यूनिट की दर से बिजली

Coal less consumption

डेस्क : बिजली पैदा करने वाले संयंत्र में कोयले की किल्लत होने के करण कई राज्यों में बिजली की संकट बढ़ती ही जा रही है। कोयले का प्रदेश कहे जाने वाले झारखंड में आपूर्ति में दिक्कत के चलते 285 मेगावाट से लेकर 430 मेगावाट की लोड शेडिंग करनी पड़ गई। जिस वजह से यहां के देहात इलाके में 8 से 10 घंटे तक बिजली नहीं रही। बात करें बिहार की तो करीब 5 गुना ज्यादा कीमत पर भी बिजली नहीं पहुँच पा रही है।

ऊर्जा विकास निगम की माने तो राज्यों को डिमांड के तुलना में बेहद न्यूनतम स्तर पर बिजली सेंट्रल पूल से दिया जा रहा है। सम्पूर्ण देश में करीब 10 हजार मेगावाट विधुत की कमी दर्ज की गई है। इन कारणों से नेशनल पावर एक्सचेंज में भी बिजली की प्रति यूनिट दर में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है। अमूमन 5 रुपये प्रति यूनिट में बिजली की कीमत अब प्रति यूनिट 20 रुपये तक बढ़ गई है।

विधुतीय संकट की सबसे बड़ी कारण बिजली पैदा करने वाले संयंत्र की किल्लत है। झारखंड के विधुत उत्पादक संयंत्रों के भंडारण में भी लिमिटेड कोयले का भंडार बचा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से बढ़ी दाम पर नेशनल पावर एक्सचेंज से विधुत खरीदने की पहल की गई है, परंतु उपलब्धता नहीं है। इस महीने आने वाले बड़े त्योहार के कारण आगामी समय में यह संकट बिकराल। रूल ले सकता है।

बिहार को पांच गुना अधिक दाम पर भी नहीं मिल रहा है पूरी बिजली

कोयला संकट आज के समय मे सबसे बड़ी संकट सावित हो रही है। इस से बिजली उत्पादन में कमी आने के वजह से बिहार को बड़ी मुसीबत में धकेल दिया है। बतादें की बिहार 4 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की प्राप्त कर लेता था। लेकिन यही अब बढ़कर 20 रुपये प्रति यूनिट तक हो गया है, इसके बावजूद भी आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही है। मार्किट से कम से कम 400 मेगावाट बिजली बिहार को खरीदनी है। जिससे विधुत कंपनी को काफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में एनटीपीसी से भी तीन से साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली ही प्राप्त हो पा रही है। इससे कई ज्यादा बिहार को आवस्यकता है, राज्य की मौजूद खपत

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