भक्तिमय महौल में शुरू हुआ नवरात्र : माँ शैलपुत्री की पूजा के साथ देवी शक्ति का पावन त्योहार शुरू

maa shailputri

डेस्क : आज 7 अक्टूबर से माता शक्ति की आराधना का त्यौहार शुरू हो गया है जो कि इस बार 8 दिनों तक चलेगा। तिथियों के मेल की वजह से इस बार पूजा सिर्फ 8 दिनों तक होगी। इस वर्ष माता रानी का आगमन डोली पर तथा गमन हाथी पर होगा।कलश स्थापना के साथ माता के पहले रूप की होगी पूजा नवरात्रि में देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा बहुत ही प्रेम, श्रद्धा तथा विधि विधान से की जाती है। इसी क्रम में आज माता के पहले रूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। साथ ही साथ कलश स्थापना भी होगा। कहा जाता है कि घर के ईशान कोण(पूर्व उत्तर) में कलश स्थापना करने से सारी नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।

माँ शैलपुत्री की कहानी

कलश स्थापना के साथ आज माँ दुर्गा के प्रथम रूप माता शैलपुत्री की पूजा होगी। इनका वाहन वृषभ है इसीलिए इन्हें वृष रूढा भी कहा जाता है।हिमालय की पुत्री होने की वजब से इनका नामकरण शैलपुत्री हुआ। इनके दायें हाथ मे त्रिशूल तथा बाएं हाथ मे कमल धारण रहता है। इनसे संबंधित एक कहानी है कि एक बार प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ किया जिसने सभी देवी देवताओं को निमंत्रण दिया गया पर भगवान शिव का अपमान करने के लिए उन्हें नही कहा गया। निमंत्रण न मिलने और शिव जी के मना करने के बाद भी जब माता सती को पता चला तो वो जाने को व्याकुल हो उठी और चली भी गई।

जब वी यज्ञ में पहुची तो वहाँ पर सभी ने भगवान शिव का अपमान,व्यंग व तिरस्कार किया। माता सती अपने पति का अपमान बर्दाश्त न कर सकी और उसी यज्ञ की अग्नि में स्वयं को भस्म कर दिया। इस बार से व्याकुल होकर भगवान शिव ने पूरी सृष्टि में विध्वंस कर दिया। किसी तरह अन्य देवताओं ने उन्हें शांत किया। यही माता सती अगले जन्म ने हिमालय राज की पुत्री शैलपुत्री कहलाई। इनके नाम पार्वती, हेमवती भी है। पुनः इनका विवाह भगवान शिव से हुआ। इनकी शक्ति अनंत है। दुर्गापूजा की पहली पूजा से ही वातावरण में साकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसीलिए सभी को इसे धारण कर जीवन को नई दिशा देनी चाहिए

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