2 February 2023

प्रेरणा! बंदरों के लिए छोड़ दिया घर- 8 साल से जंगल में रहकर मां की तरह कर रही हैं सेवा..

प्रेरणा! बंदरों के लिए छोड़ दिया घर- 8 साल से जंगल में रहकर मां की तरह कर रही हैं सेवा.. 1

डेस्क : ईश्वर ने इस प्रकृति को बेहद थी सुंदर बनाया हुआ है स्थगित में पेड़ पौधे फूल पत्ती पहाड़ पर्वत समुंद्र नदियां इंसान जानवर पक्षियों सभी का एक अच्छा समावेश है, इस समावेश से ही प्रकृति और भी खूबसूरत नजर आती है, कहते हैं जानवर इंसानों के सबसे करीब होते हैं और उपयोगी भी जैसे हम गाय भैंस बकरी से मिलने वाले दूध के ऊपर निर्भर होते हैं

कुत्ता इंसान का सबसे वफादार प्राणी होता है इसी तरीके से हर जानवर की एक अलग खासियत होती है जो उसे प्रकृति से बांधे रहती है कुछ मनुष्य ऐसे होते हैं जिन्हें प्रकृति से बेहद प्रेम होता है जिन्हें जानवरों से बेहद लगाव होता है ऐसे इंसान जानवरों के दर्द को अपना दर्द समझते हैं आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हैं एक बुजुर्ग महिला की जिसे जानवरों से विशेष लगाव है और उनकी पीड़ा को वह भली बात समझती भी हैं

जानवरों के सेवा में समर्पित है जीवन : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के कटरा में रहने वाली या बुजुर्ग महिला जानवरों की सेवा में दिन-रात तत्पर रहती है यह महिला इस कदर जानवरों से लगाव रखती है कि वह अपना घर छोड़कर अब जंगलों में ही निवास करती है हमने मोगली की कहानियों के बारे में सुना होगा इस औरत की जानवरों से लगाव को देखकर मोगली की कहानी याद आती है।

इस बुजुर्ग महिला का नाम रानी है जो जंगल में ही अपनी एक कुटिया बनाकर निवास करती है और हर परिस्थिति में जानवरों की सेवा करती है अभी गर्मियों के मौसम में जब भीषण गर्मी की वजह से नदी नाले तालाब पोखरी आधी सूख गए थे उस समय रानी नाम की इस बुजुर्ग महिला ने जंगल में रहने वाले बंदरो के लिए पानी का इंतजाम भी किया था, कहते हैं कि बंदर हनुमान जी के दूत होते हैं इन मंदिरों की सेवा रानी बड़े ही तत्परता से करती हैं, रानी या काम पिछले 8 सालों से लगातार निस्वार्थ करती आ रहे हैं

इन बंदरों की सेवा करना उनके लिए एक जुनूनी कार्य है, बंदर भी रानी का बखूबी साथ निभाते हैं और रानी की खेती करीब 2 बीघे के आसपास की है और रानी जब अपने खेतों में जाती हैं तो यह बंदर भी उनके पीछे पीछे खेतों की तरफ चल देते हैं, एक खबर के मुताबिक रानी ने इन बंदरों का नामकरण भी किया हुआ है वह बकायदा हैंडपंप चलाकर इन बंदरों को पानी पिला कर इनकी प्यास भी बुझ जाती हैं और उनका ख्याल भी रखते हैं रानी इन बंदर को प्यार से पप्पू कालू चुन्नू मुन्नू आदि नामों से पुकारते हैं और यह बंदर उसकी प्रतिक्रिया भी देते हैं, जिस किसी को भी इस बुजुर्ग महिला के बारे में किसी भी माध्यम से पता चल रहा है वह रानी की बेहद सराहना कर रहा है