31 January 2023

शादीशुदा महिला से घरेलू काम करवाना जरुरी – कोर्ट ने कहा…

शादीशुदा महिला से घरेलू काम करवाना जरुरी - कोर्ट ने कहा... 1

डेस्क: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के भाग्यनगर थाने में एक महिला ने घरेलू कामों को लेकर एक शिकायत दर्ज की थी। जिस। के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) ने इस बारे में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, ‘अगर एक शादीशुदा महिला को परिवार के लिए घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो उसकी तुलना नौकर से नहीं की जा सकती है। अगर महिला घर के काम नहीं करना चाहती तो उसे ये बात शादी से पहले ही बता देनी चाहिए, जिससे होने वाले पति-पत्नी शादी के बारे में दोबारा सोच सकें।’

आपको बता दें, 21 अक्टूबर 2022 को बॉम्बे हाईकोर्ट(Bombay Highcourt) में 2 जजों की बेंच ने एक मामले में इन बातों का ऐलान किया है। इस टिप्पणी के साथ ही CrPC की धारा 482 के तहत दर्ज केस खारिज कर दिया।

इस मामले में महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर तीन बड़े आरोप लगाए थे।

  1. शादी के एक महीने बाद ही पति और उसके परिवार वाले महिला के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करने लगे।
  2. पति और सुसराल वालों ने चार चक्का गाड़ी खरीदने के लिए महिला के पिता से 4 लाख रुपए की मांग की। इतना पैसा देने में असमर्थता जताने पर महिला को प्रताड़ित करने लगे।
  3. एक दिन बेटे के जन्म के लिए ससुराल वाले उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने कहा कि गर्भ की अवधि पूरी नहीं हुई है। इसके बाद सास और ननद ने उसके साथ मारपीट की।

इस मामले की शिकायत भाग्यनगर थाने में IPC की 4 धाराओं के तहत की गई थी। मामला में Bombay Highcourt की औरंगाबाद पीठ में जस्टिस विभा कंकनवाडी और जस्टिस राजेश पाटिल के सामने पहुंचा।

हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला के आरोपों को खारिज कर दिया। 10 पेज के फैसले में हाईकोर्ट ने ये 6 अहम बातें लिखी हैं।

  1. केस की कॉपी में लिखा है कि शादी के एक महीने बाद महिला से नौकरानी जैसा व्यवहार किया गया, लेकिन ये आरोप वेग या अस्पष्ट है।
  2. महिला ने कथित तौर पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, लेकिन सिर्फ ये 2 शब्द IPC की धारा 498A के तहत दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब कि मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने वाले कृत्यों का साफ और स्पष्ट जिक्र न हो।
  3. केस की कॉपी में कहीं भी महिला के गर्भवती होने की बात नहीं लिखी गई है और न ही गर्भवती होने से जुड़े कोई सबूत मिले हैं।
  4. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि महिला ससुराल छोड़कर आखिर अपने पति के घर क्यों गई?
  5. पति से प्रताड़ित किए जाने के 2 महीने बाद महिला ने क्यों केस दर्ज कराया, इस बात का भी केस की कॉपी में जिक्र नहीं है।
  6. अगर एक शादीशुदा महिला को परिवार के लिए घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो उसकी तुलना नौकर से नहीं की जा सकती है। अगर महिला घर के काम नहीं करना चाहती तो उसे ये बात शादी से पहले ही बता देनी चाहिए, जिससे होने वाले पति-पत्नी शादी के बारे में दोबारा सोच सकें।