कश्मीर में शहीद हुआ बिहार का लाल लेफ्टिनेंट ऋषि, 23 साल मे मिली शहादत से टूटा परिवार-

Rishi Ranjan

न्यूज डेस्क: कश्मीर के राजौरी जिले में बीते शनिवार को नियंत्रण रेखा (LOC) के नजदीक लैंडमाइन धमाका में सेना के अधिकारी व बेगूसराय के लाल ऋषि रंजन शहीद हो गए। उनकी शहादत से पूरा बिहार को उनपर गर्व तो है ही लेकिन अपने होनहार लाल को खोने पर मायूस है। वहीं ऋषि रंजन के परिवार अपने बेटे के शहादत की सच्चाई को सही नहीं मान पा रहें है। 23 वर्षीय पुत्र के चले चले जाने से परिवार टूट सा गया है।

बेगूसराय निवासी ऋषि रंजन के पिता राजीव रंजन सिंह और माता सरिता देवी समेत रिश्तेदारों में रोने बिलखने का माहौल अब तक गमगीन है। मालूम हो कि, घर के इकलौते पुत्र ऋषि रंजन का एक माह पहले ही जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग हुई थी। तीन भाई-बहन में से उनकी बड़ी बहन भी देश की सेवा में मेजर के पद पर तैनात हैं।

22 नवंबर को बहन की शादी में आने वाले थे बता दे की शहीद लेफ्टिनेंट ऋषि रंजन की बहन की शादी नवंबर महीने की 29 तारीख को होनी थी। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, बहन की डोली उठने से पहले ही,, भाई का जनाजा उठ गया। ऋषि रंजन के परिवार का सेना से गहरा रिश्ता है। परिवार के कई सदस्य भारत माता की सेवा लगे हैं।

गम व वीरता के अहसास के बीच हर कोई अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल दिखा शहादत के दुख और वीरता के अहसास के बीच हर कोई अंतिम दर्शन के लिए बेताब था। बड़ी संख्या में छात्र, रिश्तेदार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता जीडी कॉलेज पहुंचे और शहीद ऋषि के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी। जीडी कॉलेज से जैसे ही अंतिम संस्कार का जुलूस निकाला गया, जहां हजारों की संख्या में युवक सड़कों पर देशभक्ति के नारे लगाने में मग्न रहें। सभी को अपने शहीद भाई पर गर्व हो रहा था। वहीं सड़क किनारे मकानों व दुकानों की छतों से बड़ी संख्या में लोगों ने वीर सपूत के अंतिम दर्शन किये और इस गर्व के पल को अपने आँखों में कैद कर लिया।

इन गगन भेदी नारों से गूंजता रहा बेगूसराय देश के वीर सपूत ऋषि कुमार की अंतिम बारात के दौरान बेगूसराय के जीडी कालेज के फील्ड से लेकर सिमरिया गंगा किनारे तक छाती को चौड़ा कर देने वाले नारे गूंजते रहे। सभी “जब तक सूरज चांद रहेगा ऋषि तेरा नाम रहेगा”, “भारत माता की जय व वंदे मातरम” के नारे लगाते रहें। इसके अलावा युवाओं में पाकिस्तान, पाकिस्तान परस्त आतंकवाद और देश के भीतर दुबके गद्दारों के लिए गुस्सा दिखा।

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