31 January 2023

आपके Gas Cylinder में कितनी गैस बची है हिलाकर कर नही..ऐसे में चल जाएगा पता!

LPG Cylinder

डेस्क : LPG गैस ने किचन के काम को अब काफी आसान बनाया है. आज के समय में लगभग सभी लोग LPG का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई बार ऐसा होता है कि गैस की जरूरत होती है, और अचानक से पता चलता है कि गैस सिलेंडर खत्म हो चुकी है. ऐसे में, तनाव भरी स्थिति हो जाती है. LPG सिलेंडर को इस्तेमाल करना तो काफी आसान है, लेकिन इस बात का पता लगाना बेहद मुश्किल है कि सिलेंडर में कितनी गैस बची हुई है. कई बार तो गैस उसी मौके पर ही खत्म होती है, जब हमें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत होती है.

अब सिलेंडर तो ठोस लोहे का बना होता है तो ऐसे में ये कैसे पता लगाया जाए कि उसमें कितनी गैस शेष है? आज की इस खबर में हम आपको इसी समस्या का समाधान लेकर आए हैं. इस खबर में हम आपको एक ऐसी ट्रिक बताएंगे, जिसका इस्तेमाल करके आप चुटकियों में यह पता लगा सकेंगे कि आपके LPG सिलेंडर में कितनी गैस है. यह पता करके आप समय रहते अपना LPG सिलेंडर भरवा पाएंगे.

लोग ऐसे भी लगाते हैं इसका अंदाजा : सिलेंडर में कितनी गैस बची है अक्सर इसका अंदाजा कुछ लोग सिलेंडर उठाकर उसके वजन के हिसाब से ही लगाते हैं. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गैस की फ्लेम का कलर नीले से पीला होने पर ही समझ जाते हैं कि सिलेंडर की गैस अब खत्म होने की कगार पर है. लेकिन, ये सब सिर्फ एक तुक्का ही होता है. इसके सही होने का चांस बेहद कम रहता है. स्टोव के बर्नर में आई किसी दिक्कत की वजह से भी फ्लेम का रंग भी बदल सकता है. आज हम आपको जो तरीका बताएंगे वो ना तो सिर्फ आसान है, बल्कि आपको बिल्कुल सटीक रिजल्ट भी दे देगा.

आपको शायद सुनने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन आप सिर्फ एक भीगे कपड़े की मदत से यह पता लगा सकते हैं कि आपके LPG सिलेंडर में कितनी गैस बची है. इसके लिए सबसे पहले एक कपड़े को पानी में गीला कर के. अब आपको भीगे हुए कपड़े को LPG गैस सिलेंडर से लपेटना होगा. अब लगभग 1 मिनट का समय पूरा होने के बाद इस कपड़े को हटा लीजिए. अब गौर से देर LPG सिलेंडर पर होने वाले बदलावों को नोटिस कीजिए. थोड़ी देर में आप पाएंगे कि सिलेंडर का कुछ हिस्सा सूख भी गया है, जबकि कुछ हिस्सा भीगा हुआ ही है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि LPG सिलेंडर का खाली हिस्सा गर्म होने के कारण पानी जल्द सोख लेता है. वहीं, LPG सिलेंडर के जितने हिस्से में गैस भरी होती है वो हिस्सा अपेक्षाकृत थोड़ा ठंडा रहता है. इसीलिए उस जगह का पानी सूखने में थोड़ा समय लग जाता हैं।