December 10, 2022

मुग़ल काल में कौन होते थे मनसबदार ? आजके आईएएस से कितनी अलग होती थी तनख्वाह

mansabdar

डेस्क : आज के समय से अलग व्यवस्था मुगल काल में होती थी. आज की तरह उस वक्त सरकार नहीं होती थी और कर्मचारियों का भी काम अलग अलग होता था. हालांकि, प्रशासन मुगल काल में जरूर काम करता था और उसके कर्मचारी होते थे. कर्मचारियों को उस वक्त के मनसबदार कहा जाता था और सैलरी की उनकी अलग व्यवस्था होती थी. किताबों में आपने भी मनसबदार का नाम सुना होगा, तो आईए जानते हैं कि वो क्या काम करते थे और उनकी सैलरी की क्या व्यवस्था थी.

दरअसल, साम्राज्य में जैसे-जैसे अलग अलग क्षेत्र शामिल हुए, प्रशासन में वैसे ही सदस्यों की नियुक्ति होने लगी. पहले तो अधिकतर कर्मचारी सरदार, तुर्की थे, लेकिन फिर भारतीय मुसलमानों, ईरानियों, अफगानों, राजपूतों, मराठों और अन्य समूहों को भी इसमें शामिल किया गया. मनसबदार, मुगलों की सेवा में आने वाले नौकरशाह कहलाते थे.

ऐसे व्यक्तियों के लिए मनसबदार शब्द का प्रयोग होता था, जिन्हें कोई मनसब या सरकारी हैसियत या फिर पद मिलता था. यह मुगलों द्वारा चलाया गया कैटेगरी सिस्टम था, जिसके जरिए वेतन, पद, सैन्य उत्तरदायित्व निर्धारित किए जाते थे. जात की संख्या पर पद और वेतन, और वेतन का निर्धारण निर्भर था. जात की संख्या जितनी अधिक होती थी, उतनी ही दरबार में अभिजात की प्रतिष्ठा बढ़ जाती थी और वेतन भी उतना ही अधिक होता था.

मनसबदारों को जो सैन्य उत्तरदायित्व सौंपे जाते थे, उन्हीं के अनुसार घुड़सवार उन्हें रखने पड़ते थे. अपने सवारों को निरीक्षण के लिए मनसबदार लाते थे. अपने सैनिकों के घोड़ों को वे दगवाते थे और सैनिकों का पंजीकरण करवाते थे. उन्हें इन कामों के बाद ही सैनिकों को वेतन देने के लिए धन मिलता था. अपना वेतन मनसबदार राजस्व एकत्रित करने वाली भूमि के रूप में पाते थे और इन्हें जागीर कहते थे और जो कि तकरीबन इक्ताओं के समान थीं.

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