5 स्टार और 7 स्टार को भी पीछे छोड़ देता है यह शाही नवाब का स्नानघर- गोसल खाने में भी शौक़ीन मिजाज़

मुग़लों के नहाने की जगह

डेस्क : क्या आपने कभी नवाबों के शाही स्नान के बारे में सुना है? अब अगर नहीं सुना तो हम आपको दिखा रहे हैं नवाबों का ऐसा शाही स्नानघर, जो आज के किसी फाइव स्टार होटल के बाथरूम से कम नहीं था। आप इसे रॉयल बाथरूम कह सकते हैं। अवध के तीसरे नवाब मुहम्मद अली शाह बहादुर ने इसका निर्माण 1838 में कराया था जो शाही हमाम भी कहलाता है। इसकी खासियत है कि इसमें नवाब स्नान करते थे।

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बहराहल, करीब 4 बाथटब इस स्नानघर में बने हुए हैं। जिसमें नवाब एक में दूध, दूसरे में गुलाब की पंखुड़ियों के रस, तीसरे में ठंडा पानी और चौथे में गर्म पानी भरवा कर नहाया करते थे। ये चारों बाथटब इतने गहरे और इतने लंबे हैं कि कोई भी उसमें डूब सकता है। हैरानी की बात तो यह है कि इसमें नवाब पानी भरकर आराम से स्नान किया करते थे। इन सभी बाथटब में छोटे-छोटे जल निकासी के छेद भी हैं, जिसके जरिए समय-समय पर पानी को बदला जाता था। हालांकि ये सभी छेद अब बंद हो चुके है। कहा जाता जाता है कि इसमें स्नान करने के बाद नवाब छोटा इमामबाड़ा, जो कि पैगंबर साहब और उनके परिवार की याद में बनवाया गया था, वहां जाकर मत्था टेकते थे और दुआ करते थे।

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छोटा इमामबाड़ा और शाही स्नान का दीदार करने सिर्फ देश के लोग ही नहीं, बल्कि विदेशी लोग यहां आते हैं और यहां की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद करते हैं। छोटे इमामबाड़े में शाही स्नान के अलावा बेल्जियम से मंगाए गए झूमर भी लगे हुए हैं। वहीं यहां पर मोहम्मद अली शाह बहादुर और उनकी मां का मकबरा भी है। मोहम्मद अली शाह बहादुर का असली मुकुट भी उनके मकबरे के पास ही रखा हुआ है। इसके अलावा छोटे इमामबाड़े में कई तरह की खूबसूरत मोम से बने हुए ताजिया भी हैं। इसके अंदर हाथी के दांत का बना हुआ ताजिया भी मौजूद है।

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कुरान शरीफ की कई आयतें जगह जगह पर लिखी हुई हैं। कई ऐसी पेंटिंग्स यहां पर हैं, जिसको देखकर आप पूरी दुनिया में बने ईदगाह और दरगाह को एक साथ देख सकते हैं। मोहम्मद अली शाह बहादुर की बेटी और उनके दामाद की भी कब्र छोटा इमामबाड़ा में बनी हुई है, जो कि ताजमहल की तरह बनी इमारत में है। लोग इसे छोटा ताजमहल यानी लखनऊ का ताजमहल भी कहते हैं। नवाब मोहम्मद अली शाह बहादुर ने ही इन सबका निर्माण करवाया था। छोटा इमामबाड़ा की झूमर बेहद खूबसूरत है और चांद की चांदनी में इसे देखते ही बनती है। इसे पैलेस ऑफ लाइट भी कहते है।

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