9 February 2023

भारत की वो मुगल शहजादी जिसने औरंगजेब की जान बचाकर उसको बादशाह बनवाया और फिर…

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मुगलकालीन इतिहास में कुछ ऐसी महिलाएं हुई है जिनका जिक्र जल्दी नही मिलता हैं अक्सर ऐसी महिलाओं को इतिहास के पन्नो में जगह नही मिलती और उन्हें भुला दिया जाता हैं, ऐसी ही एक महिला है जिनका नाम है रोशनआरा बेगम.

हम सभी जानते है कि औरंगजेब ने मुगल सल्तनत हासिल करने के लिए अपने भाई दारा शिकोह की हत्या कराई और पिता शाहजहां को बंधक बनाकर रखा. उसे सत्ता तक पहुंचाने में उसकी बहन रोशनआरा ने पूरी जान लगा दी थी. रोशनआरा मुगल बादशाह शाहजहां और मुमताज महल की पुत्री थीं. कहा जाता है, शाहजहां को सबसे ज्यादा लगाव अपनी दूसरी बेटी जहांआरा बेगम से ही रहा. यही वजह रही कि जहांआरा खूब चर्चा में रहीं और रोशनआरा को कम ही महत्व मिला

रोशनआरा को सबसे ज्यादा सम्मान उसके भाई औरंगजेब ने दिया और उन्होंने उस सम्मान के बदले अपने भाई को तख्त तक पहुंचाया. रोशनआरा बेगम का जन्म 3 सितंबर, 1617 में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हुआ था.

सत्ता के संघर्ष में बचाये औरंगजेब के प्राण : एक दौर ऐसा भी था जब शाहजहां के बेटों में सत्ता हासिल करने की जंग शुरू हो गयी. चारों बेटों दारा शिकोह, औरंगजेब, शाहशूजा और मुराद की नजर सिर्फ मुगल सल्तनत के तख्त पर थी, लेकिन शाहजहां को सबसे ज्यादा लगाव अपने पुत्र दारा शिकोह से था. जब सत्ता को पाने का संघर्ष शुरू हुआ तो औरंगजेब की सबसे ज्यादा मदत उसकी बहन रोशनआरा से मिली थी.

औरंगजेब ने रोशनआरा को पादशाह बेगम की उपाधि से नवाजा था : रोशनआरा को अपने भाई औरंगजेब से विशेष लगाव रखती थीं. वहीं, शाहजहां की दूसरी बेटी जहांआरा बेगम दाराशिकोह का बेहद सम्मान करती थी. यही वजह रही कि उन दोनों में बहन के तौर पर सम्बंध कभी भी सामान्य नहीं रहे. बादशाह को बंदी बनाने के बाद से औरंगजेब और जहांआरा बेगम के सम्बंध भी खराब हुए. शाहजहां के शासन में बेटी जहांआरा को पादशाह बेगम की उपाधि से नवाजा गया था और हरम का प्रमुख भी बनाया गया था. औरंगजेब ने अपने शासनकाल में यह दोनों ही पद जहांआरा से लेकर दूसरी बहन रोशनआरा को दे दिए.इतना ही नहीं, रोशनआरा को मुगलिया सेना में सबसे बड़ा मनसबदार का पद भी दिया गया. औरंगजेब की अनुपस्थिति में पूरी सेना रोशनआरा के ही आधीन काम करती थी.

जब औरंगजेब ने किया बेदखल : रोशनआरा बेगम ने अपने धन को बढ़ाने के लिए औरंगज़ेब द्वारा दी गई शक्तियों और विशेषाधिकारों का खुलकर दुरुपयोग किया. सन 1668 में रोशनआरा की सत्ता का पतन हो गया जब दक्कन से दिल्ली लौटने के बाद औरंगज़ेब ने उनकी जीवन शैली और निर्णयों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की.औरंगजेब ने उन्हें दरबार को छोड़ने और दिल्ली के बाहर महल में एकांत जीवन जीने का आदेश दे दिया. 54 वर्ष की उम्र में रोशनआरा की मृत्यु हो गई.