Friday, July 12, 2024
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Motel : होटल में तो खूब रुके होंगे – क्या कभी ‘मोटल’ में रुके हैं ?

Motel : दरअसल होटल में रुकने की व्यवस्था की जाती है और यदि आप खाना खाना चाहते हैं तो आपको खाने के लिए भी मिलता है। जब आप होटल जाते हैं तो वहां पर एक दिन से ज्यादा रुकते हैं और हर होटल का अलग-अलग तरह का डिजाइन भी होता है जिसकी वजह से आप लोग उधर फोटो भी खिंचवाते है लेकिन मोटेल में ऐसा कुछ नहीं होता है। दरअसल मोटल की शुरुआत 1930 के दौरान हुई थी।

एक समय ऐसा था जब हाईवे के किनारे तेज रफ्तार में जो गाड़ियां चलती थी तो उसमें ड्राइवर लंबे सफर के दौरान थक जाते थे जिस वजह से वह हाईवे के किनारे बने टेंट में वह विश्राम करते थे वह दो-तीन घंटे विश्राम करते थे और उसके बाद फिर से अपनी लंबी यात्रा पर निकल पड़ते थे। Motel में ना खाने की व्यवस्था होती है और ना ही किसी और चीज की। यदि आप सिर्फ रुकना चाहते हैं और थोड़ा सा आराम करना चाहते हैं तो आप Motel का रुख कर सकते हैं लेकिन होटल की तरह आपको Motel जैसी सुविधा नहीं मिलेगी।

भारत में Motel का जरा भी प्रचलन नहीं है। Motel नाम का शब्द विदेश से आया है। भारत में आपको ढाबे जरूर देखने को मिलेंगे जो बड़े-बड़े हाईवे पर मौजूद होते हैं, ऐसे में ज्यादातर ट्रक ड्राइवर और लंबा जाने वाले लोग ढ़ाबे पर खाना खाते हैं परंतु हम उनको मोटल नहीं कह सकते क्योंकि मोटल का अर्थ है मोटर + होटल जिसके सारे दरवाजे होटल की तरफ ही खुलते हैं।