यदि आप भी दूध के पैकेट को ऐसे काटते हैं तो हो जाए सावधान- जानें दुष्प्प्रभाव

doodh ka packet

डेस्क : आज के समय में डेरी वर्ग पर देश का अधिकतर हिस्सा निर्भर है। अधिकतर लोगों के घर में पैकेट वाला दूध आता है यानी कि प्लास्टिक में। ऐसा माना जाता है कि ज्यादातर लोग दूध निकालने के लिए पैकेट के कोने को काट देते हैं और वह टुकड़ा अलग कर देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि दूध के पैकेट को इस तरह से काटा जाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। आपके मन में भी अब यह सवाल होता होगा कि आखिर कैसे? तो चलिए हम आपको बताते हैं कि दूध के पैकेट को इस तरह से काटना हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाता है।

साथ ही सही तरीके से काटने का तरीका भी हम आपको बताएंगे।दर्शन पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी दूध के पैकेट को काटे तो उससे टुकड़े को अलग ना करें। यदि आप कौन से भी पैकेट को काट रहे हैं तो कोशिश करें कि पैकेट से वो हिस्सा अलग ना हो। आप चाहे तो दूध निकालने के लिए पैकेट में एक छेद भी कर सकते हैं। इससे आपका दूध भी निकल जाएगा और पैकेट का टुकड़ा कटने का भी झंझट खत्म हो जाएगा।चलिए अब आपको बताते हैं कि दूध के पैकेट को कोने से काटकर अलग क्यों नहीं करना चाहिए। दरअसल ऐसा माना जाता है कि इस तरह से लाखों घरों में रोजाना दूध के पैकेट से छोटे-छोटे टुकड़ों को अलग कर डस्टबिन में फेंक दिया जाता है जो एक बड़े वेस्ट प्लास्टिक के रूप में जमा हो जाता है।

इस तरह से यह कचरा और अधिक इकट्ठा हो जाता है और सबसे परेशानी की बात यह है कि से रीसायकल भी नहीं किया जा सकता। इस पता छापी गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दूध के पैकेट के वेस्ट हो जाने पर उसका रिसाइकिल किया जा सकता है, लेकिन इन छोटे-छोटे टुकड़ों का नहीं किया जा सकता।अब जब छोटे छोटे टुकड़ों का रीसायकल हो पाना संभव नहीं है तो यह केवल कचरा बढ़ाने का ही काम करते हैं। यदि हम एक दो पैकेट की बात करें तो उसके टुकड़े कचरे की तरह नहीं लगते हैं लेकिन रोजाना ऐसे लाखों टुकड़े वेस्ट हो जाते हैं। मेरी साइकिल भी नहीं किया जा सकता।

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इसलिए हमेशा कोशिश करें कि दूध के पैकेट से इन टुकड़ों को अलग ना करें और अपने पर्यावरण को दूषित होने से बचाएं।आपको बता दें कि दूध का पैकेट लो डेंसिटी पॉलीथिन से बना होता है। यह प्लास्टिक का ही एक प्रकार है। इस तरह के प्लास्टिक को रिसाइकिल करने के लिए उच्च तापमान पर और निश्चित आकार में कंप्रेस करना पड़ता है। वहीं कोने से काटा हुआ कचरा रीसायकल यूनिट तक नहीं पहुंच पाता है और यह माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाता है जो हमारे समुद्र के के लिए भी खतरा है।