4 February 2023

पिता ठेले पर बेचते थे मूम्फ़ली, किस्मत ने छीन ली दोनों टाँगे – फिर भी हार न मानते हुए संघर्ष कर बनी IAS

पिता ठेले पर बेचते थे मूम्फ़ली, किस्मत ने छीन ली दोनों टाँगे - फिर भी हार न मानते हुए संघर्ष कर बनी IAS 1

Desk : गरीबी और विकलांग भी नहीं बन पाई कामयाबी में बाधा, पहले प्रयास में ही IAS बनीं Ummul Khair अगर लक्ष्य सफलता हासिल करने का हो तो कोई भी चीज़ उसमें बाधा नहीं बन सकती। बुलंद होसलो के साथ मैदान में उतरे व्यक्ति की कोई भी कमजोरी या कमी उसको कामयाब होने से नहीं रोक सकती। इसका उदाहरण है IAS उम्मुल खैर। जिन्होंने गरीबी और अपनी विकलांग को अपने लक्ष्य में बाधा नहीं बनने दिया और यूपीएससी (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ज़बरदस्त कामयाबी हासिल की है।

उम्मुल खैर बचपन से ही विकलांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने पहले प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा को पास किया। साल 2016 में यूपीएससी की परीक्षा में 420th रैंक हासिल कर उम्मुल ने सबको हैरान कर दिया था। एक साधारण परिवार से आने वालीं उम्मुल ने गरीबी को भी आपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया।गरीबी और विकलांग के बीच अपनी लगन और कठिन परिश्रम से उम्मुल ने अपनी काबिलियत का प्रमाण देते हुए एक IAS बनने तक का सफर तय किया। वह बचपन से ही एक बीमारी अजैले बोन डिसऑर्डर की मरीज़ थीं। इस बीमारी में इंसान के SHARIR की हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं और वह चलने-फिरने के काबिल नहीं रह जाता।

ठेले पर मूंगफली बेचा करते थे पिता : उम्मुल खैर के पिता अपने परिवार का गुजारा करने के लिए सड़क किनारे ठेला लगाकर मूंगफली बेचा करते थे। उनका पूरा परिवार दिल्ली के निजामुद्दीन के झुग्गियों में रहता था। साल 2001 में वहां से झुग्गियों के हटाए जाने के बाद उनका पूरा परिवार त्रिलोकपुरी में शिफ्ट हो गया। इस बीच उम्मुल की मां का देहांत हो गया और पिता ने दूसरी शादी कर ली। सौतेली मां का व्यवहार उनके साथ ठीक नहीं था। उनका पूरा परिवार उम्मुल की पढ़ाई के खिलाफ था। आगे चलकर उनका अपने ही परिवार में रहना इतना मुश्किल हो गया कि वो परिवार से अलग किराए के मकान में रहने लगीं। गरीबी के बीच उम्मुल ने बच्चों को पढ़ना शुरू किया ताकि उनका गुजर-बसर हो सके।

उस बीच उन्हें IAS की कठिन परीक्षा के बारे में पता चला तो उन्होंने सोचा की इसी चीज़ से हर समस्या का हल हो सकता है। तभी से उन्होंने आईएएस बनने का ठान लिया। ट्रस्ट की मदद से की 8वीं तक की पढ़ाई (SUBHEAD)उम्मुल ने अपनी पांचवी तक की पढ़ाई एक दिव्यांग स्कूल की और फिर एक ट्रस्ट की मदद से आठवीं तक की पढ़ाई की। आठवीं में एक स्कॉलरशिप पास किया, जिससे इन्हें कुछ पैसे मिले, उन पैसों से उम्मुल ने एक प्राइवेट स्कूल में अपना नामांकन कराया और वहां मैट्रिक की परीक्षा में 90% अंक हासिल किए।

इसके बाद उम्मुल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया। दिल्ली के जेएनयू से अपनी मास्टर और एम फिल पूरी करने के साथ ही उम्मुल ने यूपीएससी की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफल होकर दुनिया को दिखा दिया कि आपकी कोई भी कमी सफलता में बाधा नहीं बन सकती।गरीबी और विकलांग भी नही बीएन पाई गरीबी में बाधा ऐसे बनी इस