Friday, July 12, 2024
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Amrik Sukhdev Dhaba Story : 2 भाइयों की जंग में कैसे खुला मुरथल का फेमस अमरीक-सुखदेव ढाबा? कौन है मालिक

Amrik Sukhdev Dhaba Story दिल्ली के आसपास के लोग Amrik Sukhdev Dhaba पर अक्सर ही जाते रहते हैं और खाना खाने की इच्छा जाहिर करते रहते हैं। इस ढाबे का पराठा बहुत ही ज्यादा फेमस है, लेकिन आज हम आपको उसके पीछे की कहानी बताएंगे?

यह तब की बात है जब हरियाणा पंजाब से अलग नहीं हुआ था। बता दें की एक सरदार(लक्ष्मण सिंह) उस ढाबे को चलाते थे। उस सरदार की दो बहने थी जिसमें से पहली बहन के चार लड़के थे लेकिन ढाबा चलाने के लिए सरदार को और लोगों की जरूरत थी, जिसके चलते उन्होंने अपनी बहन का एक बेटा गोद लिया था। आपको बता दें की सरदार का कोई बच्चा नहीं था जिसके चलते फिर उनकी दूसरी बहन ने भी इच्छा जाहिर की वह उनके बेटे को भी गोद ले ले। ऐसे में अब सरदार जी के पास प्रकाश सिंह और लाल सिंह नाम के दो व्यक्ति इकट्ठा हो गए।

लेकिन कुछ समय के बाद लाल सिंह ने जिद पकड़ ली की वह ढाबा चलाएगा तो सरदार काफी परेशानी में आ गए और सरदार जी ने फिर प्रकाश सिंह के लिए नई जगह ढूंढने की व्यवस्था शुरू करदी थी। ऐसे में कई ड्राइवर ने कहा कि उनको जीटी रोड पर एक ढाबा खोलना चाहिए, पहले यह इलाका पंजाब में पड़ता था लेकिन अब यह हरियाणा में पड़ता है बता दे कि यह रास्ता इतना बड़ा है कि इससे आप बांग्लादेश से अफगानिस्तान पहुंच सकते हैं। यह रास्ता काफी पुराने व्यापारिक रास्तों में शुमार है, लंबे समय से इस रुट पर वाहन आते जाते रहते हैं।

अमृत-सुखदेव नाम कैसे पड़ा : लेकिन आप अभी यह सोच रहे होंगे कि आखिर इसका नाम अमृत-सुखदेव कैसे पड़ा तो आपको बता दें कि जब प्रकाश सिंह को जगह मिली और वह अच्छे से ढाबा चलाने लगा, तो उनके 2 बच्चे बड़े हो गए और जब उनके बच्चे बड़े हो गए तो उन्होंने कहा कि आखिर हम अपने ढाबे का नाम क्या रखें ? तो प्रकाश सिंह ने कहा कि इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है मैं तुम दोनों के नाम पर ही ढाबे का नाम रख देता हूं तो पहले बच्चे का नाम था अमरीक और दूसरे बच्चे का नाम था सुखदेव, ऐसे में दोनों भाइयों के नाम से यह ढाबा बनकर तैयार हुआ और आज तक मशहूर है।