जानिए, BPSC टॉपर गौरव सिंह की कहानी..बचपन में ही उठ गया था पिता का साया, विधवा माँ ने बीमा पॉलिसी बेचकर बनाया अफसर..

bpsc topper gaurav

न्यूज डेस्क: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने गुरुवार को 65वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा परिणाम 2021 घोषित किया। वैसे तो इस परीक्षा में बिहार के कई छात्र-छात्राओं ने अपना परचम लहराया। पर इनमे एक ऐसे भी थे जिन्होंने इस परीक्षा को टॉप कर पूरे बिहार को उनपर नाज़ है। हम बात कर रहे है रोहतास के गौरव सिंह की जो की इस परीक्षा में पहले स्थान पर रहे।

गौरव बिहार के रोहतास जिले के चमरहा गांव के रहने वाले हैं। रोहतास जिला के सासाराम अनुमंडल क्षेत्र के शिवसागर प्रखंड के चमड़हा गांव का गौरव सिंह BPSC की परीक्षा में बिहार के टॉपर बने। पूरे बिहार में पहले स्थान प्राप्त करने पर पूरे गांव में खुशी की लहर है। स्वर्गीय मनोज सिंह और शिक्षिका माता शशि सिंह के पुत्र गौरव को हर तरफ से शुभकामनाएं मिल रही हैं। उन्होंने अपनी 5वीं क्लास तक की पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद बनारस चले गए और बनारस के सेंट्रल हिंदू स्कूल से 12वीं की परीक्षा दी। फिर कलिंगा विश्वविद्यालय से मैकनिकल इंजीनियरिंग की। वही इंजीनियरिंग के दौरान ही सिविल सर्विस करने का जुनून सवार हो गया था

तीसरी बार में यह सफलता हासिल की:

दरअसल, गौरव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सिविल सर्विस की तैयारी करनी शुरू कर दी थी। फिर डिग्री पूरी होने के बाद कुछ दिनों तक पुणे में नौकरी की। इसके बाद जॉब छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी करने लगे और इन्होंने अपना ऑप्शनल विषय भूगोल रखा था। इनको तीसरी बार में नंबर वन रैंक मिला है। इससे पहले 64वीं BPSC की परीक्षा में 144वां स्थान मिला था। निदेशक सामाजिक सुरक्षा के पद पर ज्वाइनिंग होने वाली थी। उन्होंने बताया कि रिजल्ट की जानकारी मिलने पर मोबाइल में टेलीग्राम खोला, तो उसमें लिखा था कि BPSC में गौरव टॉपर। अंग्रेजी में गौरव की स्पेलिंग दूसरी लिखी थी इसके बाद रोल नंबर मिलाया। फिर पता चला कि गौरव ही टॉपर हैं। फिर मां को फोन कर जानकारी दी।

सफलता का श्रेय दिया माँ को

गौरव के पिता स्व मनोज कुमार सिंह एयरफोर्स मे सेवा मे थे। कम उम्र में ही उनकी मृत्यु हो गई थी गौरव के पास पिता की धुंधली यादें ही साथ में हैं, क्योंकि उनका काफी पहले देहांत हो गया था। इसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी गौरव की माँ ने उठाया । गौरव ने बताया की सफलता में सबसे बड़ा हाथ उनकी मां का है। पिता की मौत के बाद मां ने ही घर को संभाला और बच्चों को को काबिल बनाया । मां शशि देवी उत्क्रमित मध्य विद्यालय मे पंचायत शिक्षिका हैं।

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