खुशखबरी! अचानक इतनी सस्ती हो गई ईंट, जानें – नई कीमतें

Sasti ho gai Eent

डेस्क : घर एक नाम है, एक शब्द, यह एक शक्तिशाली चीज है। उस शब्द से भी अधिक शक्तिशाली जिसका किसी जादूगर ने सर्वाधिक प्रचंड मंत्रोच्चार के रूप में उच्चारण किया है। या किसी आत्मा ने कभी जवाब नहीं दिया है। “घर” शब्द की मजबूती पर यह वाक्य चार्ल्स डिकेंस द्वारा कहा गया है। जब यह शब्द इतना शक्तिशाली है तो फिर घर कितना शक्तिशाली होना चाहिए यह खुद सोच और समझ सकते हैं।

अगर आप भी अपने घर को इतना ही मजबूत बनाना चाहते हैं तो फिर सावधान हो जाइए। क्योंकि साफ साफ और चमकदार दिखने वाला ईंट आपके घर को बेचमकदार कर सकता है। मजबूत और टिकाऊ दिखने वाला ईंट बेहद हीं कमजोर साबित हो सकता है। क्योंकि आज कल ईंट मिट्टी में नमक डालकर तैयार किया जा रहा है। यह ईट सस्ते दामों पर आसानी से उपलब्ध है। इस इट से बने घर में सीलन और लोना की समस्या आ सकती है। गुप्त सूत्रों के अनुसार खराब मिट्टी वाले ईट भट्ठा में तकरीबन 20 दिन नमक का प्रयोग धड़ल्ले किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि नमक में मिट्टी डालने से मिट्टी की पथाई बहुत ही आसान हो जाती है। और ईट बनने के बाद वो साफ और चमकदार दिखता है। साफ और चमकदार दिखने वाला ईंट काफी कमजोर होता है। और कुछ सालों के बाद घरों में सीलन और नोना की शिकायत आने लगती है। प्लास्टर और पेंट करने के बाद भी सीलन और नोना की शिकायत दूर नहीं होती है। कोयले की मंहगाई के कारण ईट कारोबार पर काफी असर पड़ा है। कोयले के दामों में दो गुना की बढ़ोतरी होने पर बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठों में तूड़ी का भूसा, यूकेलिप्टस की लकड़ी आदि का प्रयोग ईंधन के रूप में किया जाने लगा है। मालूम हो कि कोयले से भोपाल जाने वाली बेहद मजबूत होती है।

ईधन के रूप में विभिन्न प्रकार के लकड़ी के प्रयोग से ईंट की पकाई कोयले की तुलना में बेहद खराब रहती है। यही कारण है कि मिट्टी में नमक का प्रयोग करने से भूसा व लकड़ी से पकने के बाद ईट लाल और अकर्षक दिखाई देने लगता है। ईट भट्टा के कारोबारियों का कहना है कि नमक का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता और ईधन के आधार पर करना चाहिए। अगर मिट्टी की गुणवत्ता सही नहीं है तो फिर ईट पथाई से पहले उसमें नमक मिलाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ देना चाहिए। कुछ देर बाद मिट्टी सॉफ्ट और चिकनी हो जाती है।

मिट्टी के सॉफ्ट और चिकनी हो जाने से ईट बहुत ही आकर्षक हो जाता है। कर्मचारियों की माने तो कोयले के नहीं रहने पर, दूसरे इधन के प्रयोग से भी ईट की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता है। जब खाना ना अधिकारी राजेश कुमार से इस विषय पर बात किया गया तो उन्होंने कहा मिट्टी में नमक मिलाने की जानकारी उन्हें नहीं है। इससे पहले उन्होंने कभी नहीं सुना था कि ईट में नमक का प्रयोग होता है। इस बात की सत्यता की जांच की जाएगी। अगर इस मामले में कोई दोषी पाया जाता है तो इस पर निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।

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