May 22, 2022

गया का तिलकुट क्यों है इतना प्रसिद्ध? देश विदेश में है इसकी भारी मांग

Gaya Ka Tilkut

डेस्क : तिलकुट खाने के लिए मकर संक्रांति के दिन को काफी महत्व दिया गया है। जैसे ही मकर संक्रांति का समय नजदीक आता है, बाजारों में जहां-तहां इसकी सोंधी खुशबू छाई रहती है। इस मौके पर तिल की मिठाइयां काफी बिकते हैं। जिस तरह से मुरैना की गजक फेमस है, वैसे ही गया का तिलकुट भी काफी प्रसिद्ध है।

बिहार के गया जिले में बनाए जाने वाला यह तिलकुट बड़ा ही लाजवाब होता है। देश-विदेश में इसे बनाने वाले कारीगरों को बुलाया जाता है और वहां जाकर यह कारीगर तिलकुट तैयार करते हैं। गया का तिलकुट स्वाद के साथ अपनी खुशबू से भी मन मोह लेता है। यह तिलकुट प्रवासी भारतीयों के जरिए देश के बाहर भी लोगों की पसंद बन चुका है। गया में इस तिलकुट की मुख्य रमन मंडी रमना और टिकारी रोड में है। संक्रांति के डेढ़ से दो महीने पहले ही यहां तिलकुट बनाने का काम शुरू हो जाता है। तिलकुट को बनाने की परंपरा यहां कब से चली आ रही है इसका कोई भी लिखित प्रमाण नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सदियों से होता आ रहा है।

गया को महाबोधि और मुख्य धाम के लिए अंतरराष्ट्रीय तौर पर प्रसिद्धि मिली है। इसे ज्ञान की नगरी कहा जाता है। जनवरी – फरवरी के महीने के दौरान यहां आने वाले विदेशी पर्यटक भी गया की इस तिलकुट का स्वाद चखे बिना नहीं जाते। इस तिलकुट का कोई जोड़ ही नहीं।

यहां काफी सालों से तिलकुट बनाते आ रहे कारीगर रामजी शाह के अनुसार, एक बार प्रधानमंत्री रहने के दौरान इंदिरा गांधी भी यहां के तिलकुट का स्वाद चखीं थी और इसकी तारीफ भी की थी। वहीं, एक अन्य कारीगर अवधेश कहते हैं यह तिलकुट हाथ से कूटकर बनाया जाता है। जो इतना सस्ता होता है कि जरा सा भी दबाव पर यह टूट जाता है। तिल को काफी अच्छे से साफ कर भूना जाता है। इसके बाद गुड़ या चीनी की चाशनी के साथ तिल को कूटते है। फिर इसमें मेवे मिलाए जाते हैं। इस तरह से काफी स्वादिष्ट बनाया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इससे अच्छा तिलकुट और कहीं नहीं मिल सकता।

रमना मोहल्ले के एक कारोबारी कहते हैं कि सबसे पहले रमना में ही इसे बनाना शुरू किया गया था और अब यह टेकारी, कोयरीबारी सहित अन्य कई जगहों पर बनाया जाता है।

गया जिले में बनने वाला यह स्वादिष्ट तिलकुट झारखंड, यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात के अलावा अन्य देशों जैसे कि नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भी सप्लाई किया जाता है। इसके साथ ही मॉरीशस सहित कई देशों में यह लोगों की पसंद बन चुका है।