ये क्या हो गया उपेंद्र कुशवाहा को, नीतीश से प्रेम और मोदी पर हमला आखिर चल क्या रहा है कुशवाहा के दिमाग में…

डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आये हुए लगभग महीना गुज़र चूका है और नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में नई सरकार भी बन चुकी है। सियासी उठा-पटक भी जारी है, इस बीच विपक्ष की ओर से राज्य सरकार पर तल्खी से सियासी हमले किए जा रहे हैं। लेकिन, फ़िलहाल सूबे की सियासत में एक बार फिर नये समीकरण के संकेत उभरकर सामने आने लगे है। इस नए समीकरण के होने से क्या गुल खिलेगा ये तो आने वाले समय में ही मालूम होगा ।

पर फिलहाल जब से रा्ष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की सीएम नीतीश कुमार से गुपचुप मुलाकात की खबरें सामने आईं है तब से सियासी गलियारा चर्चों से गर्म है। रोज नए नए कयास लग रहे है । मालूम हो कि सीएम हाउस में 2 दिसंबर को हुई इस मुलाकात की खबर 4 दिसंबर को सामने आने के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि अब शायद कुशवाहा-नीतीश फिर से एक होने जा रहे हैं।हालांकि, ये अलग बात है कि सियासी अटकलों के बीच कुशवाहा ने सफाई पेश करते हुए कहा है साफ कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात करना कोई अपराध नहीं है। सीएम से मुलाकात हुई है, इससे ज्यादा कोई राजनीतिक अर्थ निकालना मुनासिब नहीं है।

इस बीच एक बात और साफ हुई कि किसान आंदोलन को लेकर कुशवाहा ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला और कृषि बिल को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उपेंद्र कुशवाहा ने कृषि बिल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि ये छोटे किसानों के लिए घातक साबित होंगे और पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को इसका लाभ मिलेगा।हालांकि, कुशवाहा अब भी कन्फ्यूज दिख रहे हैं, क्योंकि एक तरफ नीतीश से दोस्ती की आस तो दूसरी तरफ केंद्र की मोदी  सरकार पर निशाना साधने की नीति राजनीतिक जानकारों की समझ से भी परे है।इसकी वजह से जो सवाल उठता है वो ये कि नीतीश-दोस्ती की दोस्ती क्या बिहार में किसी तीसरे कोण की संभावना बन रही है? राजनीतिक जानकार इसका जवाब ‘ना’ में देते हैं।ऐसे में सवाल उठता है कि तो कुशवाहा के लिए क्या है?

राजनीतिक जानकार इसके जवाब में कहते हैं कि नीतीश-कुशवाहा की दोस्ती कितनी आगे बढ़ेगी यह वक्त बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि इस तीसरे कोण का बिहार की सियासत में इसलिए भी महत्व नहीं होगा, क्योंकि नीतीश की राजनीति भी ढलान पर है और अब आने वाले समय में उन्हें रिटायरमेंट प्लान पर ही काम करना पड़ेगा।दरअसल, अगर ऐसा हुआ तो रिटायरमेंट प्लान की ओर बढ़ रहे नीतीश के लिए तो सही रहेगा, लेकिन महत्वाकांक्षी कुशवाहा की अपनी राजनीति के लिए तो कतई नहीं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की ताजा सियासत क्या मोड़ लेती है।