मुंगेर रेल सह सड़क पुल पर जनवरी 2022 से ऊपर दौड़ेंगे वाहन, नीचे चलेगी रेल,खगड़िया-बेगूसराय समेत इन जिलों को होगा फायदा..

Munger Bridge

न्यूज डेस्क : बिहार के औद्योगिक जिला बेगूसराय और ऐतिहासिक नगरी मुंगेर को जोड़ने वाली मुंगेर रेल सह सड़क पुल का कार्य अब अंतिम चरणों पर है। बता दे की मुंगेर रेल सह सड़क पुल पांच वर्ष पहले ही बन कर तैयार हो गया। और रेल मार्ग भी आरंभ हो गया। परंतु, जमीन अधिग्रहण समस्या को लेकर सड़क मार्ग अभी तक शुरू नहीं हो सका है। वही सड़क निर्माण कार्य में लगी कंपनी के अधिकारियों की मानें तो सब कुछ ठीक रहा तो जनवरी 2022 तक सड़क मार्ग चालू हो जाएगा।

कहां फंसा है पेंच: मुंगेर रेल सह पुल में कार्यत प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार सड़क पुल से संबद्ध दोनों ओर कुल 14.5 मीटर लंबी एवं 60 मीटर चौड़ी NH-333 (क) निर्माण प्रस्तावित था। स्वीकृति मिलने के बाद जमीन अधिग्रहण का कार्य प्रारंभ हुआ। इसमें कई बाधाएं आई। प्रशासन के हस्तक्षेप से पुरानी अधिग्रमण की गई जमीन पर हरियाणा की कंपनी एसपी सिगला द्वारा पथ निर्माण कार्य शुरू हुआ। आगे उन्होंने बताया पुल के उत्तरी किनारे से NH-31 हीराटोल तक 5.133 किलोमीटर तक पथ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसी बीच कुछ रैयतों द्वारा उचित मुआवजा नहीं मिलने एवं जमीन अधिग्रहण की शर्त में सरकारी नौकरी नहीं दिए जाने की मांग को लेकर निर्माण कार्य अवरुद्ध कर दिया। इससे काफी दिनों तक निर्माण कार्य प्रभावित रहा। अंतत: प्रशासन के कड़े रुख से मामले को निपटाया गया।

दिसंबर 2021 तक काम पूरा कर लिया जाएगा: पथ निर्माण कार्य के प्रोजेक्ट मैनेजर केके पाठक का कहना है कि मुंगेर सड़क पुल के उत्तरी ओर एनएच 31 हीराटोल से पुल के निकट तक 4.5 किलोमीटर (KM) पथ में तीन किलोमीटर तक पीचिग कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष डेढ़ किलोमीटर पथ निर्माण कार्य में मिट्टी भराई कार्य पूर्ण होने की कगार पर है। इसके अलावा पुल के उत्तरी छोर से नीचे सड़क तक 633 मीटर की दूरी के लिए 19 छोटे बड़े पिलर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस पाए के उपर ढलान तक उपरी छत का स्ट्रक्चर चढ़ाने का कार्य जारी है। यह दिसंबर 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। सब कुछ ठीक रहा तो जनवरी 2022 में सड़क से आवगमन शुरू हो जाएगा।

करीब 19 साल से अटका हुआ है यह एप्रोच पुल: बता दे की मुंगेर रेल सह सड़क पुल का निर्माण कार्य करीब 19 साल से अटका हुआ है। पुल का शिलान्यास 26 दिसंबर, 2002 को ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। जबकी, रेलगाड़ी परिचालन के लिए मार्च 2016 को ही खोला दिया गया था। अंतत: 11 अप्रैल 2016 को रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा द्वारा बेगूसराय-जमालपुर डेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर इसे पैसेंजर ट्रेनों के लिए खोला गया था। 921 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण 2007 में ही पूरा होने का लक्ष्य रखा था। फिर बाद में जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण इसकी लागत में बढ़ोतरी हो गयी। और फिर 16 नवंबर, 2015 को पुल के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 2774 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी।

पुल बन जाने से इन जिलों को होगा फायदा: बता दे की मुंगेर रोड एप्रोच पथ बन जाने से बेगूसराय खगड़िया और मुंगेर एक साथ कनेक्टिविटी में जुड़ जाएगी। जिससे यात्रियों तथा व्यापारियों का मार्ग और सुगम हो जाएगा। एप्रोच पथ बन जाने से खगड़िया और बेगूसराय की दूरी मुंगेर से महज 30 से 40 किलोमीटर तक हो जायेगी। जिससे मुंगेर से खगड़िया और बेगूसराय का सफर कुछ मिनटों में तय हो सकेगा। फिलहाल, बेगूसराय से मुंगेर जाने के लिए लोगों को सड़क मार्ग से करीब 160-170 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है। अगर रेल मार्ग की बात करें तो सब्दलपुर जंक्शन खगड़िया और बेगूसराय दोनों को एक साथ जोड़ता है।

फिलहाल, कुछ ट्रेनों का परिचालन शुरू है: बता दें कि मुंगेर रेल पुल पर अभी कुछ ही ट्रेनों का आवागमन शुरू है। जबकि, मुंगेर रेल पटरियों का कार्य 2016 में ही पूरा हो चुका था। लेकिन अभी तक सही ढंग से रेल परिचालन नहीं हो रहा है। अगर पैसेंजर ट्रेन की बात करें तो एक ही डेमो गाड़ी तिलरथ-जमालपुर दो फेरे चलाई जाती है। जबकि, यही गाड़ी खगड़िया के लिए भी दो फेरे चलाई जाती है। वही एक्सप्रेस के रूप में एक भागलपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। वह खगड़िया के लिए जमालपुर-सहरसा एक स्पेशल एक्सप्रेस चलाई जा रही है।

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