बिना किसी विरोध के सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ़, महागठबंधन में नहीं बनी सहमति

डेस्क : केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर एनडीए प्रत्याशी सुशील कुमार मोदी की निर्विरोध ताजपोशी तय मानी जा रही है। हालांकि, आगामी 3 दिसम्बर तक उप चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन है। लेकिन, अभी तक एनडीए के अलावा अन्य किसी दल से उम्मीदवार तय भी नहीं हुए हैं। एनडीए में भाजपा कोटे की सीट पर पार्टी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर दांव लगाया है। ऐसे में श्री मोदी को वॉकओवर मिलने की पूरी संभावना बनती दिख रही है।

मालूम हो कि राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन ने दलित कार्ड खेलने का काफी प्रयास किया, किंतु इस मामले में उसे खास सफ़लता नहीं मिल पाई। राज़द ने भरपूर कोशिश की लोजपा की नाराजगी को भुनाने कि, पर अफसोस ऐसा हो न सका। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की मां रीना पासवान को प्रत्याशी बनाने का विपक्ष का दांव परवान नहीं चढ़ सका। बकौल राज़द, दलित नेता रामविलास पासवान जी की सीट पर लोजपा का अधिकार है। उनकी पत्नी रीना पासवान के प्रत्याशी बनने पर पार्टी बिना शर्त समर्थन करेगी। हालांकि, लम्बी चुप्पी के बाद लोजपा ने राजद का आभार जताते हुए इस मामले का पटाक्षेप कर दिया।

महागठबंधन की और से रीना पासवान पर दांव खेलने की पूरी तैयारी थी। लेकिन उनके तैयार न होने की स्थिति में किसी दलित चेहरे को मैदान में उतारने की चर्चा थी जिसमें पूर्व मंत्री श्याम रजक का नाम काफी उड़ा ताकि भाजपा और जदयू को दलितों के बीच घेरा जा सके। मगर श्याम रजक के नाम पर भी फैसला नहीं लिया जा सका। हालांकि सूत्रों की माने तो रीना पासवान के नाम पर स्वयं राज़द सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपनी सहमति दी थी। पर उनके इन्कार के बाद एनडीए प्रत्याशी सुशील कुमार मोदी की राहें आसान होती दिखाई पड़ रही है। मालूम हो कि बिहार विधानसभा में 40 दलित विधायक हैं।