अफसोस! बिहार की Cycle Girl Jyoti की नहीं बदली किस्मत, अब पाई-पाई को हुई मोहताज..

bihar jyoti girl

डेस्क : हमारे देश में लाख खूबियां हैं लेकिन सबसे बड़ी खूबी है यहां गरीब भी बड़े से बड़े पद पर जा सकता है। और यहां बनने वाले ज्यादातर नियम गरीब के लिए हीं होता है। ऊपर के पंक्ति में उपयोग हुआ ‘ गरीब’ शब्द का क्या मतलब है यह तो मुझे नहीं पता। देश में गरीबी की मानक क्या है यह भी मुझे नहीं पता लेकिन इतना पता है गरीबों के लिए बनने वाले नियम अमीर हितैषी कैसे हो जाते हैं।

अगर आप भी शासन-प्रशासन के काम करने के तौर तरीके से वाकिफ होंगे तो आपको भी यह बात पता होगी। खैर अब गाड़ी की पहिया को मोड़ते हैं साइकिल गर्ल के नाम से मशहूर ज्योति की ओर। अब आप सोच रहे होंगे गरीबी की बात करते करते मैं ज्योति पर कैसे पहुंच गया। आप उस ज्योति को जानते होंगे जिसके लिए अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के सीएम नीतीश कुमार और न जाने किन किन लोगों ने ट्वीट किया था। अगर आप यह सब जान रहे हैं तो एक कहावत और जानते होंगे या अगर नहीं जानते हैं तो जान लीजिए, ‘ चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात’।

यह कहावत सुनते ही आपको रानू मंडल की याद आ रही होगी लेकिन आप उस ज्योति को याद कीजिए जिसके संघर्ष की गाथा हर एक के जुबान पर थी। दरअसल कोरोना काल में चर्चा में आई ज्योति अपनी आर्थिक परेशानियों से जूझ रही है। गौरतलब है कि कोरोना के दौरान अपने बीमार पिता को गुरुग्राम से अपने घर दरभंगा साइकिल से लेकर आई थी। उसके इस बहादुरी के चर्चे देश-विदेश सब जगह हुआ था। अमेरिका के उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने भी ट्विटर पर ज्योति के इस साहस को सराहा था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेवी ज्योति से वर्चुअल बात की थी।

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दरअसल कोरोना के दौरान जब सब कुछ बंद था तब हजारों लोग पैदल अपने घर पहुंचे थे। दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहुल्ली गांव की रहने वाली ज्योति भी गुरुग्राम से 1300 किलोमीटर साइकिल चलाकर 8 दिन में अपने बीमार पिता को लेकर अपने गांव पहुंची थी। ज्योति के आर्थिक स्थिति को देखते हुए देश के जाने-माने नेताओं ने उसके पढ़ाई और शादी का खर्च उठाने का वादा किया था। ज्योति के चर्चा में आने के बाद बिहार सरकार के कई मंत्री और विधायकों ने उसके घर जाकर पढ़ाई लिखाई की खर्च उठाने की बात कही थी। लेकिन 2 वर्षों में ही ज्योति वहीं पहुंच गई जहां से उसने शुरुआत की थी।

साइकिल गर्ल ज्योति के अनुसार शुरुआत में तो कुछ लोगों ने मदद किया लेकिन अब कोई साथ नहीं दे रहा है और तो और जिन लोगों ने पढ़ाई लिखाई और शादी का खर्च उठाने का भरोसा दिया था अब वह लोग भी अपने वादे से मुकर गए हैं। वादा करने वाले ज्यादातर लोग अब फोन नहीं उठाते हैं और जो लोग फोन उठाते हैं वो ज्योति को पहचानने से ही इनकार कर देते हैं। अब ज्योति के सिर से उसके पिता का साया उठ चुका है। मां भी आंगनवाड़ी में मामूली सहायिका है। घर की माली हालत ठीक नहीं है।

घर में इनकम का जरिया नहीं होने के कारण ज्योति पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी की भी इच्छा जाहिर कर रही है ताकि किसी तरह घर को चला सके। ज्योति ने बताया मैट्रिक पास करने के बाद इंटर में नामांकन कराने के लिए किसी ने भी आर्थिक मदद नहीं की। खुद किसी भी तरह पैसे का बंदोबस्त कर इंटर में नामांकन करवाया लेकिन अब परीक्षा फॉर्म भरने की चिंता सता रही है। ज्योति ने बताया कुछ पैसे उनके रिश्तेदार देते हैं। घर में आमदनी का कोई स्रोत नहीं है और 2 वर्षों में उसके जीवन में कोई भी बदलाव नहीं हुआ।