क्या है विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021, जिसको लेकर कल विधानसभा में दिन भर हुआ हंगामा…

Special Armed Police Bill 2021

डेस्क / प्रिंस कुमार : बिहार विधानसभा में मंगलवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। विपक्षी विधायकों को सदन से घसीट-घसीट कर बाहर निकाले जाने की घटना का देश भर के एनडीए विरोधी दलों ने निंदा की है। दरअसल कल बिहार विधानसभा में सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021पेश किया गया था , जिसे विपक्ष काला कानून बता रहा है। विपक्षी दलों ने इस बिल का इतना जोरदार विरोध किया कि सदन के अंदर पुलिस बुलाना पड़ा। पुलिस के जवानों द्वारा विधायकों के पिटे जाने का वीडियो वायरल होने पर देश भर में बिहार पुलिस की आलोचना हो रही है।

क्या है यह विधेयक- बिहार में बिहार मिलिट्री पुलिस यानी बीएमपी के विकास तथा इसको कुछ विशेष ताकत देने के लिए इस बिल को लाया गया है। विधानसभा में इसे पेश करते हुए प्रभारी मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बताया कि इस बिल से 129 वर्ष से कार्यरत बीएमपी को कुशल प्रशिक्षित , पूर्णतः सुसज्जित , तथा सुदृढ़ बनाया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने बाद बीएमपी का नाम बदल कर विशेष सशस्त्र पुलिस हो गया है। विशेष सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को अब एलएमजी, मोर्टार आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह विशेष बल अब उग्रवाद से मुकाबला, प्रतिष्ठानों की बेहतर सुरक्षा तथा औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा भी करेंगे।

विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध- इस बिल में एक प्रावधान किया गया है जिसके मुताबिक विशेष सशस्त्र पुलिस बल के सक्षम अधिकारी किसी घटना के बाद आशंका के आधार पर संदेहास्पद व्यक्ति की तलाशी और गिरफ्तारी बिना वारंट के कर सकता है। विपक्षी दल इसी प्रावधान का विरोध करते हुए आरोप लगा रहे हैं की इसका पुलिसवाले गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि इससे पुलिस को असीमित शक्तियां मिलेंगी और जनता का शोषण होगा।

क्या कहना है राज्य सरकार का- विपक्षी दलों द्वारा पुलिस को बिना वारंट तलाशी लिए जाने के आरोपों पर मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि यह तो पुलिस को मौजूदा समय में भी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कोई अगर पुलिस पर हमला करेगा औऱ शांति-व्यवस्था भंग करने की कोशिश करेगा तो पुलिस हाथ पर हाथ धरे नही बैठे रहेगी। उन्होंने कहा कि इस बिल में दिए गए अधिकारों का अगर कोई दुरुपयोग करता है तो उसपर तुरंत कारवाई की जाएगी।

सरकार ने यह भी कहा कि औद्योगिक इकाइयां तथा अन्य महत्वपूर्ण जगहों लर इस बल की तैनाती की जाएगी , इसलिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तरह इसे भी गिरफ्तारी और तलाशी की शक्ति देने की आवश्यकता है। मंगलवार को सदन में बिल पेश होते समय विपक्षी दलों का प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि इसपे कोई खास चर्चा नहीं हो सकी। हालांकि विपक्षी विधायकों के विरोध के बाद भी यह बिल सरकार ने पास करवा दिया।

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