राजगीर के जू सफारी की शोभा बढ़ाएंगें गुजरात के गिर से आए छह शेर, बेगूसराय समेत इन जिलों में इको टूरिज्‍म की बनी योजना

Rajgir Zoo

न्यूज डेस्क: बिहार के नालंदा जिला स्थित राजगीर की पहाड़ियों में बन रहे नेचर सफारी में अब शेर की गर्जन से इलाका गूंज उठेगा, दरअसल, पर्यावरण विभाग की टीम ने इस नेचर सफारी का शोभा बढ़ाने के लिए गुजरात के जूनागढ़ शक्करबाग जुलाजिकल पार्क (Sakkarbaug Zoological Park) से 6 नए बब्बर शेर लाए गए है। जिसमें दो नर शेर और चार मादा शेर है। मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार की दोपहर विभाग की टीम ने इन शेरों को सफारी में डालकर क्‍वारंटाइन कर दिया। जब उनमें कोरोना का कोई असर नहीं दिखेगा तो उसके बाद आए हुए शेरों को राजगीर में बन रहे जू सफ़ारी में छोड़ दिया जाएगा।

बता दे की बिहार से गैंडा देने के बाद गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान से 6 शेर लाए गए हैं। चुकी: गिर राष्ट्रीय उद्यान के शेरों के प्रजनन की क्षमता अधिक मानी जाती है, इसके साथ ही पालन के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है, इसीलिए इसी राष्ट्रीय पार्क से शेर को लाया गया ताकि धीरे-धीरे राजगीर की पहाड़ियों में शेर का विस्तार हो सके। बता दे की अब राजगीर के जू सफारी में शेरों की कुल संख्या सात हो गई है। इससे पहले इस नेचर सफारी के लिए पटना के चिड़ियाघर से एक शेर सहित दो रायल बंगाल टाइगर, दो भालू और दो तेंदुए को लाया जा चुका है। अब ओडिशा के कटक से दो जोड़ी तेंदुआ तथा बाघ को लाने की तैयारी की जा रही है। इस प्रकार से जू सफारी में बाघ की संख्या चार और तेंदुओं की संख्या भी इतनी ही हो जाएगी।

50 से अधिक छोटे-बड़े स्पाट होंगे इको टूरिज्म के लिए बिहार सरकार राज्य में टूटिज्म के विकास को लेकर सरकार लगातार कोशिश है। बिहार के बेगूसराय में कावर झील पक्षी बिहार , मुंगेर , भागलपुर में गंगा नदी में डॉल्फिन रिसर्च सेंटर, रोहतास व कैमूर की वादियों में इको टूरिज्म मैप पर बिहार के 50 से अधिक छोटे-बड़े जगहों को जगह मिलेगी। वाल्मीकिनगर पहले से है। इसके अतिरिक्त जमुई में नागा नकटी पक्षी विहार, बेगूसराय का कांवर झील, रोहतास व कैमूर के कई मनोरम स्थल, मुंगेर, भागलपुर का गरुड़ संरक्षण केंद्र, गया का नगर वाटिका, अररिया व कटिहार आदि इको टूरिज्म के लिहाज से बड़े स्पाट हैं।

अधिकारी बताते हैं : जानकारी देते हुए वाइल्ड लाइफ जू सफारी के निदेशक हेमंत बताते हैं कि इस जू सफारी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। शेष बचे निर्माण कार्य तेजी गति से पूरा किया जा रहा है। अभी गुजरात से लाए गए शेरों को क्वारंटाइन में रखा गया है। ताकि वे यहां के जलवायु और परिवेश में खुद को सहज बना सकें। कुछ दिनों में राजगीर की आबोहवा में स्वाभाविक रूप से स्वच्छंद रूप से ढल सकें। उन्होंने बताया कि हिंसक जंगली जानवरों को एक से दूसरे स्थान पर लाने के क्रम में बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती है। इसीलिए बारिकियों के साथ सभी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जा रहा है।

You may have missed

You cannot copy content of this page