May 19, 2022

साइंस टीचर का अनूठा आविष्कार – देसी जुगाड़ कर बना दी Electric Bike, देती है 3 गुना माइलेज, जानें..

science teacher

डेस्क : हमारे देश में शिक्षक को भगवान् का दर्जा दिया जाता हैं। शिक्षक ही होता है जो हमारा मार्गदर्शक होता हैं। वहीं हमें सही राह दिखाता है। शिक्षक को हम गुरु भी कहते है। आज हम आपको ऐसी हि गुरु के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होने E-Bike का आविष्कार किया है। आप बोलेंगे EBike तो बहुत पहले आ गई इसमें नया क्या है।

आज हम आपको यही बताएंगे की इस बाइक में ऐसा क्या है जो यह आज इतनी वायरल हो रही है। बिहार के मधेपुरा जिले में एक व्यक्ति ने कबाड़ से ई-बाइक बना डाला। विज्ञान शिक्षक किशोर कुमार सिंह ने 3 हजार में खरीदी पुरानी बाइक को जुगाड़ से बदलकर इलेक्ट्रिक बाइक कर दी। एक बार चार्ज करने पर यह बाइक 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 70 किलोमीटर तक चलती है।

मधेपुरा में एक विज्ञान शिक्षक ने कबाड़ से इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है। वह जिस बाइक से अपनी रोजमर्रा की जरूरत का काम करता था, उसे उसने जुगाड़ से ई-बाइक बना लिया है। मधेपुरा के किशोर कुमार सिंह अमित इलेक्ट्रॉनिक के नाम से दुकान चलाते हैं। वह पिछले 10 साल से इलेक्ट्रॉनिक बाइक बनाने के काम में लगा हुआ था। दो बाइक पहले भी बनाई गई थी, लेकिन वह सफल नहीं रही। लेकिन, लुक और स्टाइल के मामले में यह बाइक किसी से कम नहीं है।

दरअसल, यह बाइक Yamaha की RX 100 है। भारत में इसका प्रोडक्शन कई साल पहले ही बंद कर दिया गया था। यह बाइक या तो कबाड़ में मिल जाती है या फिर लोग इसे शौक से अपने घर में सजाकर रखते हैं। किशोर ने इसे स्क्रैप में 3 हजार रुपये में खरीदा और इसे इलेक्ट्रिक बाइक में बदल दिया। इंजन को बंद कर दिया गया और लिथियम-आयन बैटरी को स्टील के शाइनिंग बॉक्स में डाल दिया गया। चार्जर और उसके चार्जिंग पॉइंट को एयर बॉक्स से बनाया गया था।

सबसे बड़ा काम था मोटर को सेट करना और पहिए को घुमाना, इसके लिए किशोर ने हब मोटर को ऑनलाइन ऑर्डर किया। इसे Yamaha के पहिए में सेट करना भी काफी बड़ी चुनौती थी. किशोर ने पल्सर का हब यामाहा के हब में लगाया और उसमें मोटर लगाई। किशोर का कहना है कि यह बाइक एक बार चार्ज करने पर 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 70 किलोमीटर तक चलती है। उन्होंने कहा कि वह इसी बाइक से अपने सभी जरूरी काम करते हैं। तेल की बढ़ती कीमतों में यह काफी किफायती है। एक टाइम था जब बाजार में इनवर्टर नहीं आते थे तो वे अपने हाथों से इनवर्टर बनाते थे।

आज भी अगर किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत करनी पड़ती है तो लोग उसके पास ही आते हैं। 10 साल के प्रयास के बाद, किशोर ने स्क्रैप से एक शानदार इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है, लेकिन अब वह कबाड़ से इलेक्ट्रिक कार बनाने की सोच रहे है। उन्होंने बताया कि डायग्राम बनकर तैयार है, बस जरूरत है एक सस्ती जंक कार की। भविष्य में ई-कार बनाने की इच्छा किशोर के दोस्त बताते हैं कि किशोर को बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक्स से बहुत लगाव है। बच्चों को कम उम्र से ही विज्ञान की शिक्षा देने के साथ-साथ वे इलेक्ट्रॉनिक्स में नए-नए प्रयोग करते रहते हैं।