बिहार के विश्वविद्यालय में किताब घोटाला, जानिए- कैसे हुई महा-घोटाले की शुरुआत

Patliputra University

डेस्क: नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सरकार अपने 16 साल के कार्यकाल में कई घोटालों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है, वही अब बिहार में कई विश्वविद्यालयों के द्वारा किताब खरीद को लेकर घोटालों का पता लगा है, जबकि इससे पहले वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति का बड़ा घोटाला सामने आया था,

बताते चलें कि इन दिनों बिहार के कई विश्वविद्यालयों की तरफ से किताबों की खरीद से जुड़ा है। करोड़ों रुपए की किताब दिल्ली की एक कंपनी से अलग-अलग विश्वविद्यालयों ने खरीदी है। इस पूरी खरीद में घोटाले की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि, किताबों की खरीद के लिए किसी भी टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दिल्ली स्थित एक कंपनी को ऑर्डर दिए गए और करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया। 

विद्यार्थी पढ़ने लायक एक भी बुक नहीं है: बता दें कि जिस कंपनी से किताब खरीदी गई, उसका नाम इंडिका पब्लिशर्स एंड डिसटीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड है। जहां से सभी विश्वविद्यालयों ने बगैर टेंडर के ही एक ही कंपनी से ली है। शुरुआती छानबीन में पता चला है कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, तिलकामांझी विश्वविद्यालय ने इसी कंपनी से किताबों की खरीद की इसकी जांच चल रही है। कई कॉलेज के प्राचार्य और शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालयों ने जिन किताबों की खरीद की है वह किसी उपयोग की नहीं हैं।

अलमारी की शोभा बढ़ाने के लिए बुक खरीदी जाती है: वही विभागाध्यक्ष कह रहे हैं कि बहुत सारी किताबें तो ऐसी हैं जो सिलेबस के मुताबिक मेल नहीं खाती सिर्फ बुक्स अलमीरा की शोभा बढ़ाने के लिए किताबों की खरीद कर दी गई। इस मामले की जांच विजिलेंस की टीम कर रही है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने इस बात की पुष्टि की है कि किताबों की खरीद इंडिका पब्लिशर्स डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड से ही की गई है। 

विश्वविद्यालय का निर्माण भी नहीं हुआ लेकिन बुक खरीदा गया: सोचने वाली बात यह है कि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का भवन अब तक बनकर तैयार भी नहीं हुआ, लेकिन यहां से पांच करोड़ रुपए की किताबें और अलमीरा की खरीद कर ली गई। शिक्षकों और छात्रों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि पुस्तकों की खरीद में मानकों का पालन नहीं किया गया सिलेबस और करंट अफेयर्स से जुड़े किताबों की खरीद की गई होती तो यह उपयोग लायक होती। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने तो हद ही कर डाला है। किताबों की खरीद करने के बाद उसे किराए के एक मकान में रखा गया है। किताबों को रखने के लिए विश्वविद्यालय की तरफ से 50 लाख रुपये से ज्यादा का किराया साल भर में विश्वविद्यालय को देना होगा।

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