December 6, 2022

कभी..लालू यादव के चलते PM बनने से चूक गए थे मुलायम सिंह, शरद को भी मानते थे जिम्‍मेदार..

mulayam

डेस्क: सोमवार 10 अक्टूबर को खबर आई की मुलायम सिंह यादव नहीं रहे। आज सुबह उनका निधन हो गया। मुलायम सिंह से जुड़ी कई सारी बातें इस समय साझा की जा रही हैं। इसी क्रम में उनके बारे में एक और बात सामने आई कि मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए थे।

ये बात है साल 1997 में जब अटल बिहारी वाजपेई की सरकार गिरी थी, तब संयुक्त मोर्च मिली-जुली सरकार की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम सिंह यादव का नाम आगे रखा जा रहा था। पर उस समय के तत्‍कालीन जनता दल से अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इसका विरोध किया और ऐसा नहीं हो लगा। जिसके बाद इस बारे में खुद मुलायम सिंह यादव ने भी कहा था कि लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, चंद्र बाबू नायडू और वीपी सिंह ने उन्‍हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। हालांकि, कालक्रम में बाद में लालू प्रसाद यादव से उनके संबंध मधुर हो गए।

16 दिनों में गिरी थी वाजपेई सरकार : 90 के दशक की बात है जब देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल था। उस समय कांग्रेस के एकछत्र राज वाला दौर समाप्‍त हो चुका था और धीरे धीरे भारतीय जनता पार्टी उभर रही थी। साल 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। कांग्रेस को 141 सीटें ही मिलीं। जिसके बाद सबसे बड़ी पार्टी का दावा करते हुए सरकार बनाने का दावा किया था। जिसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन वे लोकसभा में बहुमत सिद्ध नहीं कर सके। इस कारण केवल 16 दिनों में ही उनकी सरकार गिर गई।

ये भी पढ़ें   अद्भुत! Bihar में हर दिन पकड़ी जा रही 10 हजार लीटर शराब, रोजाना हो रहे 1529 तस्कर गिरफ्तार..

लालू के वजह से छूट गई थी कुर्सी : वाजपाई सरकारी गिरने के बाद संयुक्‍त मोर्चा की सरकारों का अस्थिर दाैर आया और एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने। उसी समय लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाला को लेकर सीबीआई शिकंजा कसा जा रहा था। फिर प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने उन्‍हें इस मामले में कोई राहत नहीं दी। पत्रकार व लेखक संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब में बताया कि “1997 में चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव ने देवगौड़ा को फोन लगाकर खरी-खोटी सुनाई थी। तब देवगौड़ा ने भी दो-टूक कह दिया था कि भारत सरकार और सीबीआइ कोई जनता दल नहीं है कि जब चाहा जिसे चाहा भैंस की तरह हांक दिया। तब 22 सासंदों वाले लालू प्रसाद यादव के कारण देवगौड़ा की कुर्सी चली गई।”

पीएम के लिए सामने आया मुलायम का नाम : देवगौड़ा के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए किसी नए चेहरे की तलाश थी। तब लालू प्रसाद यादव के नाम की भी चर्चा हुई, लेकिन चारा घोटाला में सीबीआइ का शिकंजा आड़े आ गया। मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के ज्योति बसु ने उनकी उम्मीदवारी पर ​वीटो लगा दिया। चंद्र बाबू नायडू का नाम सामने आया, लेकिन वे संयुक्त मोर्चा की अस्थिरता में फंसना नहीं चाहते थे। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव का नाम भी सामने आया।

मुलायम के विरोध में अड़ गए लालू यादव : अपनी किताब ‘बंधु बिहारी’ में संकर्षण ठाकुर बताते ने कहा है कि “मुलायम सिंह यादव के नाम पर चंद्रबाबू नायडू व वाम दल सहमत थे, लेकिन लालू प्रसाद यादव अड़ गए कि एक यादव को ही प्रधानमंत्री बनना है तो वे खुद क्यों नहीं हो सकते? जब उनके खिलाफ चारा घोटाला में जांच चल रही थी तो मुलायम सिंह यादव पर भी तो भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लालू ने फिर चंद्र बाबू नायडू और वाम दलों के सामने साफ छवि वाले इंद्र कुमार गुजराल का नाम आगे किया। उनके नाम पर सहमति बन गई।” जिसके बाद मुलायम सिंह यादव प्रधानमंत्री नहीं बन पाए।

ये भी पढ़ें   गर्व! Bihar के लाल का संयुक्त राष्ट्र मास्टरमाइंड लिए हुआ चयन, दुनियाभर केवल 30 लोग पहुंचे इस मुकाम तक..

मुलायम सिंह यादव ने किया था कबूल : एक समय खुद मुलायम सिंह ने कहा था कि “लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, चंद्र बाबू नायडू और वीपी सिंह ने उन्‍हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था। हालांकि, तब से अब तक राजनीति के कई दौर आ-जा चुके हैं। कालक्रम में लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव के संबंध मधुर हो गए।”